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PHOTO: इस्लामाबाद वार्ता के बीच अमेरिका ने फिर दबाई ईरान की नस, पोर्ट जाते जहाज को पकड़ा

ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका ने एक बार फिर उसके जहाज को रोक दिया. अमेरिकी नौसेना के डेस्ट्रॉयर ने ईरानी झंडे वाले जहाज को पोर्ट की ओर बढ़ते वक्त इंटरसेप्ट किया. होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा रहा है.

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अमेरिका लगातार ईरानी जहाजों को पकड़ रहा है. (Photo- CENTCOM)
अमेरिका लगातार ईरानी जहाजों को पकड़ रहा है. (Photo- CENTCOM)

इस्लामाबाद में बातचीत की संभावनाओं के बीच ईरान के खिलाफ अपने सख्त रुख को जारी रखते हुए अमेरिका ने एक बार फिर उसके एक जहाज को रोक दिया है. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी कि अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS राफेल (DDG 115) ने 24 अप्रैल को एक ईरानी झंडे वाले जहाज को इंटरसेप्ट किया. यह जहाज ईरान के एक पोर्ट की ओर बढ़ रहा था, जिसे अमेरिकी कार्रवाई के तहत बीच रास्ते में ही रोक दिया गया.

CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ जारी समुद्री प्रतिबंधों को लागू करने के तहत की गई. अमेरिका ने अप्रैल की शुरुआत से ही ईरान के पोर्ट्स के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड लागू किया हुआ है, जिसका मकसद ईरान के व्यापार और तेल निर्यात को सीमित करना है. इसी रणनीति के तहत अब तक दर्जनों जहाजों को रोका जा चुका है या उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया है.

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इस ब्लॉकेड का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर देखने को मिल रहा है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और एलएनजी सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. लेकिन मौजूदा हालात में यहां जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 और 23 अप्रैल के बीच सिर्फ सात जहाज इस रास्ते से गुजर पाए, जिनमें से छह ईरान से जुड़े व्यापार में शामिल थे.

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अमेरिकी ब्लॉकेड से तेल सप्लाई बाधित

होर्मुज स्ट्रेट में इस तरह की रुकावटों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाला है. तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल देखने को मिला है. यही वजह है कि इस टकराव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.

अमेरिका-ईरान की इस्लामाबाद में वार्ता

सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं. अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता होने वाली है. दोनों मुल्कों के प्रतिनिधियों के बीत वार्ता की कोई संभावना नहीं है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आपस में कोई बात नहीं करेंगे. ईरान का प्रतिनिधि पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुका है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में है.

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अमेरिका की तरफ से फिलहाल प्रतिनिधि पाकिस्तान नहीं पहुंचा है. रिपोर्ट्स की मानें तो राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेएर्ड कुश्नर और उनके करीबी स्टीव विटकॉप के रूप में एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना हुआ है. अमेरिका की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि वे आपस में राउंड टेबल वार्ता करेंगे या नहीं. अब तक की जानकारी के मुताबिक वे एक-दूसरे संग पाकिस्तानी चैनल के जरिए बात करेंगे.

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