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लेबनान का आदेश नहीं मान रहा ईरान, बेरूत से राजदूत वापस बुलाने से किया मना

हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने लेबनान सरकार के लिए स्थिति बहुत को बहुत जटिल बना दिया है. एक तरफ लेबनान सरकार संप्रभुता और नियंत्रण की लड़ाई लड़ रही है, तो दूसरी ओर हिज्बुल्लाह और ईरान का प्रभाव उसकी नीतियों को चुनौती दे रहा है.

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लेबनान में ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी (L) और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची. (Photo: Reuters)
लेबनान में ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी (L) और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची. (Photo: Reuters)

लेबनान ने ईरानी राजदूत को देश से बाहर जाने के लिए कह दिया है. लेकिन ईरान ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया. इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है, खासकर ऐसे समय में जब ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष तेज हो रहा है. लेबनानी ने ईरानी राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी पर उसकी घरेलू राजनीति में दखलंदाजी करके राजनयिक मानदंडों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ रज्जी ने ईरानी राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी को पर्सोना नॉन ग्राटा (Persona Non Grata) घोषित कर 29 मार्च तक देश छोड़ने का आदेश दिया था, ताकि ईरान की कूटनीतिक मौजूदगी कम की जा सके.

पर्सोना नॉन ग्राटा एक लैटिन फ्रेज है जिसका मतलब होता है 'अस्वीकार्य या अवांछित व्यक्ति'. लेबनान ने जो समयसीमा दी थी वह कल ही खत्म हो गई, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि मोहम्मद रजा शिबानी बेरूत में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, 'लेबनान में हमारा दूतावास सक्रिय है और हमारे राजदूत वहीं मौजूद हैं.' लेबनानी अधिकारियों की ओर से उनके इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी राजदूत अब भी दूतावास में मौजूद हैं और उन्हें राजनयिक प्रतिरक्षा (Diplomatic Immunity) प्राप्त है.

इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सआर (Gideon Sa'ar) ने तंज कसते हुए कहा कि ईरानी राजदूत बेरूत में आराम से मौजूद है, जिससे लेबनान की स्थिति का मजाक बन रहा है. इस बीच, हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हमले करके ईरान के साथ जारी उसके संघर्ष में शामिल हो गया, जिसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई शुरू की और राजधानी बेरूत के कई हिस्सों पर बमबारी की. लेबनान के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इजरायल की सैन्य कार्रवाई में अब तक 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. 

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लेबनान ने ईरानी राजदूत को देश छोड़ने को कहा

इससे पहले लेबनान ने हिज्बुल्लाह और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की सैन्य गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद ईरानी राजदूत को निष्कासित करने का फैसला लिया गया. हिज्बुल्लाह ने लेबनान सरकार के इस कदम को 'गैर-जिम्मेदाराना' और 'विदेशी दबाव के आगे झुकना' बताया और ईरानी दूतावास के समर्थन में रैली भी की. हिज्बुल्लाह नेता महमूद कमाती ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'आग से मत खेलो, वरना यह आग सबको जला देगी.' लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने इस फैसले को पलटने के लिए सरकार और संसद पर दबाव बनाया. वहीं, बेरूत को चिंता है कि ईरान इस मुद्दे को अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल कर सकता है, जिससे हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करने की कोशिशें प्रभावित होंगी.

हिज्बुल्लाह खुद को इजरायल के खिलाफ लेबनान का एक सुरक्षा कवच बताता है और सामाजिक सेवाएं देने का दावा करता है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि उसकी सशस्त्र ताकत लेबनान की संप्रभुता को कमजोर करती है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नुकसान पहुंचाती है. इस विवाद ने लेबनान में युद्ध खत्म करने के कूटनीतिक प्रयासों को भी कमजोर कर दिया है. राष्ट्रपति जोसेफ औन (Joseph Aoun) और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम (Nawaf Salam), जहां इजरायल की कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं, वहीं हिज्बुल्लाह के हमलों की भी निंदा कर चुके हैं.

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लेबनान में क्या है सरकार और हिज्बुल्लाह की स्थिति?

लेबनान में सरकार और हिज्बुल्लाह के बीच संबंध बेहद जटिल, संवेदनशील और टकरावपूर्ण हैं. देश में सत्ता संचालन के दो केंद्र हैं. लेबनान की सरकार आधिकारिक रूप से एकमात्र वैध सत्ता है, लेकिन जमीन पर हिज्बुल्लाह एक समानांतर ताकत बना हुआ है. देश के एक बड़े हिस्से पर उसका नियंत्रण है. हिज्बुल्लाह सिर्फ एक मिलिटेंट संगठन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक पार्टी भी है. संसद और सरकार में उसके सहयोगी मौजूद हैं. हिज्बुल्लाह के पास लेबनान की सेना से भी ज्यादा ताकतवर हथियार और सैन्य ढांचा माना जाता है. वह खुद को इजरायल के खिलाफ रक्षा कवच बताता है, खासकर खुद को शिया समुदाय का प्रतिनिधि मानता है.

यह भी पढ़ें: कहानी मेरी जुबानी: लेबनान में ड्रोन हमलों के खतरे के बीच हिज्बुल्लाह कमांडर का हाई-रिस्क इंटरव्यू

लेबनान सरकार हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करना चाहती है. वह चाहती है कि हथियार सिर्फ देश की सेना के पास होना चाहिए. सरकार पर अमेरिका, पश्चिमी और अरब देशों का दबाव है कि वह लेबनान की आधिकारिक सेना के अलावा देश में मौजूद अन्य हथियारबंद समूहों को खत्म करे. हिज्बुल्लाह ईरान के करीब है, जबकि सरकार संतुलन चाहती है. हिज्बुल्लाह कई बार बिना सरकारी मंजूरी के इजरायल पर हमले करता है. लेबनान की सरकार हिज्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर रोक और देश में ईरान के प्रभाव को कम करने की कोशिश तो कर रही. लेकिन वह हिज्बुल्लाह के साथ सीधे टकराव से बचना चाहती है, क्योंकि इससे लेबनान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है.

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