ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं. राजधानी तेहरान के बाजार से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब देश के कई पश्चिमी और दक्षिणी शहरों तक फैल चुके हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, बीते नौ दिनों में कम से कम 25 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल हैं. इसके साथ ही 1000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. चर्चा इस बात की है कि क्या ट्रंप ईरान पर हमला करेंगे? जैसा की उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रेस्क्यू करने की चेतावनी दी थी.
हालांकि, मौजूदा प्रदर्शन 2022-23 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए देशव्यापी आंदोलन जितने बड़े नहीं हैं, लेकिन इनका स्वर तेजी से आर्थिक मांगों से आगे बढ़कर सत्ता विरोधी नारों में बदल रहा है. कई जगहों पर प्रदर्शनकारी ईरान के धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाते देखे गए हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं.
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इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान सरकार को सख्त चेतावनी दी है. 3 जनवरी को ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या करता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए तैयार है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और किसी भी कार्रवाई के लिए सतर्क है.
ट्रंप के बयान पर खामेनेई ने दी चेतावनी
ट्रंप की इस धमकी के जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे ईरान नहीं झुकेगा. ईरानी सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों के भी दो जवान मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं.
ईरान में कहां-कहां हो रहे प्रदर्शन?
मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, अब तक 27 प्रांतों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं और यह छोटे शहरों तक फैल चुके हैं. संगठन का कहना है कि कुल गिरफ्तारियों की संख्या 1200 से अधिक हो सकती है. हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
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ईरान सरकार ने सुधार का किया वादा
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस बीच हालात को संभालने की कोशिश करते हुए संवाद का आह्वान किया है. सरकार ने मुद्रा और बैंकिंग सुधारों का वादा किया है और सब्सिडी सुधार की घोषणा की है, जो 10 जनवरी से लागू होगी. इनके अलावा 29 दिसंबर को केंद्रीय बैंक प्रमुख को भी हटा दिया गया है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं.