ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस (युवराज) रजा पहलवी ने देश में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों को अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन के अंत के लिए एक स्वर्णिम अवसर करार दिया है. अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान की मौजूदा धर्मतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त करने के लिए किसी भी तरह के अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप या स्पेशल ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव ईरानी जनता खुद ला सकती है, क्योंकि इस्लामिक शासन इस समय अपने सबसे कमजोर दौर में है.
रजा पहलवी लंबे समय से लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ईरान की वकालत कर रहे हैं. हाल के दिनों में उन्होंने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरानी जनता के साथ खड़े होने की अपील की है. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि यह किसी बाहरी हस्तक्षेप का मामला है, चाहे वह सैन्य हो या किसी विशेष अभियान के जरिए. मुझे लगता है कि यह शासन खुद बिखर रहा है. यह अपने सबसे कमजोर दौर में है.' उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ईरान में लोग केवल बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे इस्लामिक शासन को खत्म करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं. पहलवी के मुताबिक, ईरान के मौजूदा हालात पहले के विरोध प्रदर्शनों से अलग हैं.
उन्होंने कहा, 'इस बार जो साफ तौर पर अलग है, वह यह है कि अब इस काम को पूरा करने और इस शासन से छुटकारा पाने का वास्तविक मौका है. एक तरह से कहें तो ग्रहों की स्थिति अनुकूल है. कई स्तरों पर हालात ऐसे बन चुके हैं कि इस्लामिक शासन का पतन संभव दिख रहा है.' पहलवी का मानना है कि देश के भीतर बढ़ता जनआक्रोश, आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय दबाव और इस्लामिक शासन की साख में आई गिरावट, सभी मिलकर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहे हैं.
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जनता करे ईरानी के भविष्य का फैसला: पहलवी
भविष्य में अपनी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर रजा पहलवी ने किसी सत्ता या पद की लालसा से इनकार किया. उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को इस संकट से बाहर निकालने में मदद करना और देश को एकजुट करना है. पहलवी के मुताबिक, यदि सत्ता परिवर्तन होता है तो सबसे बड़ी जरूरत देश की राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को संभालने की होगी, ताकि वर्षों की दमनकारी नीतियों और विभाजन के घावों को भरा जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के भविष्य का फैसला ईरानी जनता को ही करना चाहिए.
रजा पहलवी का कहना है कि मौजूदा आंदोलन केवल विरोध नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक मोड़ है, जो ईरान को एक नए राजनीतिक रास्ते पर ले जा सकता है. 2025 के अंत से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब 2026 में भी जारी हैं. आर्थिक संकट, ईरानी मुद्रा रियाल में डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड गिरावट और चरम महंगाई के कारण लाखों लोग इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर हैं. कई शहरों में प्रदर्शनकारी 'जाविद शाह' यानी 'शाह अमर रहें' के नारे लगा रहे हैं, जो पहलवी राजवंश की वापसी का संकेत है. सुरक्षा बलों की सख्ती के बावजूद प्रदर्शन फैल रहे हैं और कुछ जगहों पर हिंसक झड़पें भी हुई हैं.
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कौन हैं रजा पहलवी, ईरान से क्या रहा है नाता?
रजा पहलवी ईरान के अंतिम शाह (राजा) मोहम्मद रजा शाह पहलवी के सबसे बड़े पुत्र हैं. रजा पहलवी का जन्म 31 अक्टूबर 1960 को तेहरान में हुआ था. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद उनके पिता की सत्ता समाप्त हो गई और शाही परिवार को देश छोड़ना पड़ा. तभी से रजा पहलवी अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं. वह खुद को ईरान की वर्तमान इस्लामिक व्यवस्था का लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं. वह ईरान में धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और मानवाधिकार आधारित शासन की वकालत करते हैं.
हालांकि वह कभी-कभी राजशाही की बहाली के सवाल पर चर्चा करते हैं, लेकिन उन्होंने कई बार कहा है कि ईरान का भविष्य जनमत संग्रह से तय होना चाहिए. वह अमेरिका में रहते हैं और ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन के अंतर्गत मानवाधिकार उल्लंघनों, राजनीतिक दमन और आर्थिक बदहाली के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाते रहे हैं.
हाल के वर्षों में, विशेषकर सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान, वह ईरानी विपक्ष की एक प्रमुख आवाज बनकर उभरे हैं.