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'रोजाना 14 करोड़ डॉलर से ज्यादा', होर्मुज पर ब्रेक लगाकर जंग से खूब कमा रहा ईरान! समझें पूरा 'खेल'

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद ईरान युद्ध के बीच अपने तेल निर्यात को जारी रख रहा है और इससे भारी आर्थिक लाभ कमा रहा है. ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले किए हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. यह स्थिति उसके हक में जा रही है.

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ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोक रहा है (File Photo)
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोक रहा है (File Photo)

अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान को भारी नुकसान हो रहा है. युद्ध की शुरुआत में ही ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अला खामेनेई मारे गए और अब इजरायल का दावा है कि उसने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी को मार गिराया है. लेकिन इस संघर्ष की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि यह युद्ध ईरान का खजाना भर रहा है.

अमेरिका और इजरायली हमलों के जवाब में ईरान इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी हितों को निशाना बना रहा है. ईरान खाड़ी देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हमले कर रहा है. ईरान ने मध्य-पूर्व के तेल सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया है. इस कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है. तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा फायदा अमेरिका के दो कट्टर दुश्मनों ईरान और रूस को हो रहा है. 

इस युद्ध का एशिया में बड़ा नुकसान महसूस किया जा रहा है जहां खरीदार तेल-गैस को स्टोर करने और उसके नए सप्लायर्स के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. लेकिन इसका वित्तीय फायदा उल्टी दिशा में जा रहा है- ईरान को, जो युद्ध और प्रतिबंधों के बावजूद तेल बेच रहा है. और रूस को भी, जो तेल बेचकर भारी कमाई कर रहा है.

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बाजार की स्थिति का फायदा उठा रहे रूस और ईरान

युद्ध के 18वें दिन मंगलवार को भी ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इराक में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया जिसमें शाह फील्ड और फुजैरा का बंदरगाह शामिल है. ईरान के तेज होते हमलों के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

मिडिल ईस्ट का युद्ध अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इसके कम होने के कोई संकेत नहीं हैं. 

खाड़ी देशों की तरफ से तेल सप्लाई, सीमित शिपिंग और ब्रेंट की ऊंची कीमतें, मार्केट की यही स्थिति है जिसमें ईरान और रूस असामान्य रूप से बड़ा फायदा उठा सकते हैं.

ईरान को युद्ध से हो रही कमाई सीधी और तुरंत है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में उछाल के बीच ईरान रोजाना तेल बेचकर 14 करोड़ डॉलर से ज्यादा कमा रहा है.

ईरानी तेल की सप्लाई पर रोक नहीं लगा रहा अमेरिका

ईरान अपना तेल इसलिए बेच पा रहा है क्योंकि अमेरिका वैश्विक आपूर्ति संकट को और बिगड़ने से बचाने के लिए देशों को अपना तेल बेचने दे रहा है. अमेरिका सैन्य रूप से ईरान पर हमला कर रहा है, लेकिन उसके तेल निर्यात को पूरी तरह रोक नहीं रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से कम से कम 13 सुपरटैंकर ईरान के मुख्य निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप से कच्चा तेल लोड कर चुके हैं.

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डेटा एनालिटिक्स फर्म केपलर का डेटा दिखाता है कि इस दौरान करीब 2.4 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरा. ईरान का तेल आसानी से होर्मुज से पास हो रहा है जबकि अन्य देशों के तेल टैंकर को रोका जा रहा है, उनपर हमले हो रहे हैं.

सीएनबीसी से बात करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'ईरानी जहाज पहले से ही निकल रहे हैं और हमने ऐसा होने दिया है ताकि दुनिया के बाकी हिस्सों को आपूर्ति मिलती रहे. हमें लगता है कि एक स्वाभाविक रास्ता खुला है जिसे ईरानी इस्तेमाल कर रहे हैं और फिलहाल हम इससे संतुष्ट हैं. हम चाहते हैं कि दुनिया में तेल आपूर्ति बनी रहे.'

इसका मतलब साफ है, अमेरिका के खिलाफ युद्ध में तेहरान न केवल डटकर खड़ा है, बल्कि इससे कमाई भी कर रहा है. ईरान का फायदा सिर्फ यह नहीं है कि वो तेल बेच रहा है, बल्कि यह है कि युद्ध ने उसे क्षेत्रीय बाजार को अपने पक्ष में झुकाने का मौका दिया है.

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