ईरान अब बदले की आग में जल रहा है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, जिसमें उनके सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद से ईरान ने सिर्फ इजरायल ही नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट के बाकी देशों पर भी मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं. इसी बीच ईरान ने धमकी देते हुए कहा है कि वह अब एक टन से ज्यादा वजन वाले वॉरहेड वाली मिसाइलें ही लॉन्च करेगा.
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर माजिद मौसवी ने सोमवार को कहा कि ईरान सिर्फ एक टन से ज्यादा वजन वाले वॉरहेड वाली मिसाइलें ही लॉन्च करेगा.
इसका मतलब हुआ कि ईरान अब ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाना चाहता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक ईरान ने 1 टन से कम वजन वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. इन मिसाइलों ने ही तेल अवीव में कई इमारतों को तबाह कर दिया है. अगर ईरान एक टन से ज्यादा वजन वाली मिसाइलें इस्तेमाल करता है तो इससे बड़ी सी बड़ी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है और भयंकर तबाही मच सकती है.
इतना ही नहीं, माजिद मौसवी का यह भी कहना है कि अब ईरान मिसाइल लॉन्च की वेवलेंथ और इंटेंसिटी बढ़ाने के साथ-साथ हमलों का दायरा भी बढ़ाएगा.
अभी भी कमजोर नहीं हुआ है ईरान?
अमेरिका और इजरायल दावा कर रहे हैं कि उनके हमलों ने ईरान को कमजोर कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के पास अब कुछ नहीं बचा है. उनके 80% हथियार खत्म हो चुके हैं.
लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट बताती है कि ईरान के पास अब भी हथियारों का एक मजबूत जखीरा है. इस रिपोर्ट में यूके के पूर्व रक्षा सलाहकार और मिडिल ईस्ट के जाने-माने मिलिट्री एनालिस्ट मार्टिन सैम्पसन का जिक्र है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन हथियारों में क्रूज मिसाइल, साइबर वॉरफेयर और माइंस शामिल हैं. सैम्पसन ने WSJ से कहा कि ईरान के पास अभी भी बड़े पैमाने पर हमला करने की क्षमता है.
क्लस्टर बॉम्ब का कर चुका है इस्तेमाल
ईरान ने हाल ही में इजरायल पर क्लस्टर बॉम्ब से हमला किया है. इससे कई लोगों की मौत हुई है और दर्जनों घायल हुए हैं. क्लस्टर बॉम्ब को सबसे खतरनाक माना जाता है. पिछले साल जून में 12 दिनों की जंग के दौरान भी ईरान ने इनका इस्तेमाल किया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, जब क्लस्टर बॉम्ब से हमला किया जाता है तो मिसाइल जमीन से लगभग 7 किलोमीटर ऊपर कई छोटे-छोटे बमों में बंट जाती है. जब ये बम जमीन पर गिरते हैं तो ये 8 किलोमीटर के दायरे तक अपना असर छोड़ते हैं. हर छोटे बम में अमूमन 2 किलो विस्फोटक होता है.