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'एक तरफ शांति का ढोंग, दूसरी तरफ नए हथियारों की तैनाती...', अमेरिका की दोहरी चाल पर भड़का ईरान

ईरान ने अमेरिका पर युद्ध खत्म करने की बात करते हुए सैन्य तैनाती बढ़ाने का आरोप लगाया है. इसी बीच 10 दिन तक हमले रोकने का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद बनी है.

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ईरान का ट्रंप पर पलटवार. (Photo: Reuters)
ईरान का ट्रंप पर पलटवार. (Photo: Reuters)

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने अमेरिका पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि 'अमेरिका एक तरफ शांति का ढोंग करता है और युद्ध खत्म करने की बात कहता है, दूसरी तरफ लगातार मध्य पूर्व में लगातार नए सैन्य हथियार भेज रहा है'. गलिबाफ ने साफ कहा कि शांति की बात तभी भरोसेमंद मानी जाएगी, जब अमेरिका के कदम भी उसी दिशा में दिखें.

गलिबाफ ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका दुनिया के सामने शांति का संदेश देता है, लेकिन जमीन पर नए सैन्य उपकरण भेज रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को लगता है कि ईरान उसकी रणनीति नहीं समझ पा रहा, लेकिन ऐसा नहीं है. ईरान अब इन सभी चालों को पहचान चुका है और उसी के मुताबिक अपनी तैयारी कर चुका है. उनके मुताबिक, किसी भी देश के इरादे सिर्फ बयानों से नहीं, बल्कि उसके कदमों से तय होते हैं. अगर अमेरिका वास्तव में तनाव कम करना चाहता है तो उसकी कार्रवाई भी उसी दिशा में होनी चाहिए.

गलिबाफ का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया है कि कुछ मध्यस्थों ने दोनों देशों के सामने 10 दिन तक हमले रोकने का प्रस्ताव रखा है. इसका मकसद अंतरिम समझौते (Interim Deal) को फिर से शुरू करने की संभावनाएं तलाशना है. हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी किसी भी पक्ष ने आधिकारिक सहमति नहीं दी है.

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दूसरी तरफ जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में हमले हुए हैं. होर्मोजगान प्रांत समेत कई इलाकों में तेल के प्लांट, हवाई अड्डे, रेलवे नेटवर्क और दूसरे जरूरी ढांचे हमलों की चपेट में आए हैं. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हाल के हमलों में पहले के मुकाबले ज्यादा नुकसान हुआ है.

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान को कड़ी चेतावनी दे चुके हैं. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान नहीं मानता है तो उसके ऊर्जा ढांचे, खासकर कच्चे तेल से जुड़े संयंत्रों को भी निशाना बनाया जा सकता है. ऐसे में एक तरफ हमले रोकने की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच तनाव कम होता नहीं दिख रहा.
 

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