ईरान हर दिन कम से कम 60 लाख लीटर ईंधन पड़ोसी देश पाकिस्तान में तस्करी के जरिए भेज रहा है. पाकिस्तान के व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स ने बताया कि यह कारोबार अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए जारी है.
ईंधन की यह तस्करी युद्ध के बीच आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत बनी हुई है. ईरान के लिए भी यह फायदे का सौदा है जो पहले से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का सामना कर रहा है, जिससे उसके तेल निर्यात पर भारी असर पड़ा है. अमेरिका-इजरायल की कई हफ्तों तक चली बमबारी ने मध्य-पूर्वी देश के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है.
ईरान करीब 2013 से पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की तस्करी कर रहा है. उसी समय अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध काफी सख्त कर दिए थे. हालांकि, अब संकेत मिल रहे हैं कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद ईंधन तस्करी की मात्रा और बढ़ गई है.
अमेरिका-इजरायल की बमबारी के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल सप्लाई का एक अहम रास्ता माना जाता है. इसके चलते दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में उछाल आ गया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा.
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का सहयोगी पाकिस्तान अब ईरानी तेल की तस्करी रोकने के लिए दबाव में आ सकता है. पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म कराने के लिए बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है. अमेरिका को इस तस्करी की खबर है और वो पाकिस्तान पर इसे रोकने का प्रेशर डाल सकता है.
किन रास्तों से और कैसे हो रही ईरान से पाकिस्तान में तेल की तस्करी
इस तस्करी की जानकारी अमेरिकी सरकार समर्थित ब्रॉडकास्टर 'रेडियो लिबर्टी', जिसे 'रेडियो फ्री यूरोप' भी कहा जाता है, को पाकिस्तानी अधिकारियों ने ईंधन तस्करी की जानकारी दी.
ईरानी ईंधन को पाकिस्तान के साथ लगी करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा पर मौजूद लगभग एक दर्जन क्रॉसिंग पॉइंट्स तक पहुंचाया जाता है. इस बॉर्डर पर निगरानी बहुत कम होती है जिससे यह तस्करी आसान हो जाती है. इसके बाद पेट्रोल और डीजल को कनस्तर में भरकर सैकड़ों पिकअप ट्रकों और यहां तक कि मोटरसाइकिलों के जरिए पाकिस्तान के विशाल और गरीब बलूचिस्तान प्रांत समेत दूसरे इलाकों में पहुंचाया जाता है.
बलूचिस्तान के पत्रकार अकबर नोटेजई ने कहा कि हर कनस्तर में करीब 60 लीटर ईंधन आ सकता है. उनके मुताबिक एक पिकअप ट्रक में 30 कनस्तर यानी करीब 1,800 लीटर ईंधन ले जाया जा सकता है. मोटरसाइकिलों पर भी कई कनस्तर लादे जाते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार ईरानी ईंधन की समुद्री रास्ते से भी तस्करी होती है. नावों के जरिए इसे पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंचाया जाता है. हालांकि, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का समुद्री तस्करी पर कितना असर पड़ा है, यह साफ नहीं है.
ईरान से हर साल 1 अरब डॉलर से ज्यादा का पेट्रोल पाकिस्तान आता है!
मई 2024 में पाकिस्तान की दो खुफिया एजेंसियों की एक लीक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान हर साल 1 अरब डॉलर से ज्यादा का पेट्रोल और डीजल पाकिस्तान में तस्करी के जरिए भेजता है.
रिपोर्ट में कहा गया था कि हर दिन करीब 60 लाख लीटर तस्करी वाला ईरानी ईंधन पाकिस्तान पहुंचता है, जो देश की सालाना खपत का लगभग 14 प्रतिशत है.
रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन की रोजाना तस्करी में करीब 2,000 वाहन और 1,300 नावें शामिल थीं. इसमें यह भी कहा गया कि ईरान को भुगतान हवाला सिस्टम के जरिए किया जाता था, जो उधार देने वालों का एक अनौपचारिक नेटवर्क है. बैंकों की बजाय दलालों के जरिए चलने वाली इस व्यवस्था का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है और इसका इस्तेमाल सशस्त्र समूह भी करते रहे हैं.
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने अगस्त 2024 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ईरान सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने और तेल तस्करी रोकने के लिए 'लगातार प्रयास' किए जा रहे हैं.
चौधरी ने कहा था, 'अगर आंकड़ों को देखें तो ईंधन तस्करी 1.5-1.6 करोड़ लीटर प्रतिदिन से घटकर 50-60 लाख लीटर प्रतिदिन रह गई है.'
तेल की किल्लत के बीच पाकिस्तान में एक बार फिर बढ़ी ईरानी ईंधन की तस्करी
एक पाकिस्तानी तेल व्यापारी ने कहा कि फिलहाल ईरान-पाकिस्तान सीमा पर मौजूद हर क्रॉसिंग से रोजाना करीब 300 वाहन ईंधन लेकर निकलते हैं. उसके मुताबिक 2024 में पाकिस्तानी अधिकारियों की कार्रवाई से पहले यह संख्या करीब 600 वाहन प्रतिदिन थी.
बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में रहने वाले विश्लेषक शाहजादा जुल्फिकार ने कहा कि अब फिर से तस्करी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
उन्होंने कहा कि पहले तस्करी नेटवर्क हफ्ते में सिर्फ पांच दिन सक्रिय रहता था. उन्होंने बताया, 'ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद डीलर्स अब सातों दिन यह कारोबार जारी रखे हुए हैं.'
पाकिस्तान के व्यापारियों, ट्रांसपोर्टर्स और विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय और प्रांतीय अधिकारी ईंधन तस्करी को नजरअंदाज करते हैं.
इस तस्करी से पाकिस्तान को सस्ता ईंधन मिलता है. करीब 24 करोड़ आबादी वाले पाकिस्तान में ईंधन की भारी कमी देखने को मिली है. मार्च की शुरुआत से कीमतें करीब 250 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 400 रुपये से ऊपर पहुंच गई हैं.
यह तस्करी बलूच समुदाय के लिए आमदनी का अहम जरिया भी है. यह जातीय समूह ईरान-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर रहता है. पाकिस्तान का अशांत बलूचिस्तान प्रांत कई सालों से विद्रोह का केंद्र बना हुआ है.
क्वेटा के पत्रकार सैयद अली शाह ने कहा कि सरकार बलूचिस्तान में पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करने में नाकाम रही है, जो देश का सबसे पिछड़ा प्रांत माना जाता है.
उन्होंने कहा, 'इसी वजह से अधिकारियों ने सीमा क्षेत्रों में लोगों की आजीविका बनाए रखने के साधन के तौर पर तेल तस्करी को बर्दाश्त किया है.'
तस्करी से ईरान को होता है फायदा
ईरान को भी ईंधन तस्करी से फायदा होता है. ईरान कई सालों से अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने और अपनी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले तेल के निर्यात के लिए तस्करी नेटवर्क और 'शैडो फ्लीट' का इस्तेमाल करता रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार इन तस्करी नेटवर्क्स की निगरानी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) करती है, जो देश में एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक शक्ति केंद्र है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से होने वाली ईंधन तस्करी रोकने के लिए अब पाकिस्तान पर अमेरिका का दबाव बढ़ सकता है.
13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है, ताकि ईरान को अमेरिकी शर्तों पर शांति समझौते के लिए मजबूर किया जा सके.
इस्लामाबाद के विश्लेषक मेहताब हैदर सैयद ने कहा, 'अमेरिका की ओर से आपत्ति हो सकती है. लेकिन पाकिस्तान जवाब में यह कह सकता है कि यह बेहद लंबी और ढीली सीमा है, जहां सुरक्षा पहले से ही एक गंभीर मुद्दा रही है.'