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'महिलाओं का रेप, गर्भाशय निकाला, सिर की खाल नोची...', ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की बर्बरता!

ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. ईरानी-जर्मन पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही ने दावा किया है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने इस्लामी शासन के खिलाफ जन आंदोलन को कुचलने के लिए महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा का हथियार की तरह इस्तेमाल किया.

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ईरान में सत्ता परिवर्तन के समर्थन में टोरंटो में प्रदर्शनकारियों ने अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें जलाईं. (Photo: AP)
ईरान में सत्ता परिवर्तन के समर्थन में टोरंटो में प्रदर्शनकारियों ने अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें जलाईं. (Photo: AP)

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन ने अपने​ खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को भले ही दबा दिया हो, लेकिन इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा की गई क्रूरता को लेकर बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं. एक ईरानी-जर्मन पत्रकार के अनुसार, ईरान में प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई में सिर्फ हजारों लोगों की हत्या ही नहीं हुई, बल्कि महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और अंग-भंग को भी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया.

तेहरान में जन्मे और जर्मनी में रहने वाले पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही ने दावा किया है कि विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरानी शासन ने यौन हिंसा का सहारा लिया. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुल्लाही के आरोपों की पुष्टि जर्मन अखबार 'डाइ वेल्ट' (Die Welt) में प्रकाशित प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से भी होती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरफ्तार महिलाओं को सुरक्षा बलों ने बलात्कार की धमकियां दीं. इसके अलावा, हिरासत में महिलाओं को जबरन निर्वस्त्र किए जाने और इंजेक्शन दिए जाने की भी खबरें हैं.

सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में अब्दुल्लाही ने बताया कि उन्हें ऐसे कई प्रत्यक्ष बयान मिले हैं, जिनमें ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को चुनौती देने वाली महिलाओं पर ढाए गए अत्याचारों का जिक्र है. इनमें हिजाब पहनने से इनकार करना, बाइक चलाना और सर्वोच्च नेता खामेनेई की तस्वीर जलाकर सिगरेट सुलगाना जैसे विरोध के तरीके शामिल थे. ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए देशव्यापी प्रदर्शन आर्थिक संकट के विरोध से आगे बढ़कर इस्लामी शासन के खिलाफ जन आंदोलन में बदल गए.

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महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुआ बलात्कार

अब्दुल्लाही ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बेहद डरावने आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, उनके गर्भाशय (Uterus) निकाल दिए गए, सिर की खाल उधेड़ दी गई और शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान बनाए गए. अब्दुल्लाही ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन ने अपने ही लोगों के खिलाफ बलात्कार को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. उनका यह भी कहना है कि बच्चों तक को इसी तरह की हिंसा का शिकार बनाया गया.

डाइ वेल्ट की रिपोर्ट में भी प्रत्यक्षदर्शियों के ऐसे ही बयान सामने आए हैं. जर्मन अखबार को एक महिला प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने सुरक्षा बलों को घायल और बिना घायल युवतियों को वाहन में एक-दूसरे के ऊपर फेंकते हुए देखा. उसने ईरानी सुरक्षा बलों के अधिकारियों को कहते सुना, 'हम तुम्हें अभी नहीं मारेंगे, पहले बलात्कार करेंगे, फिर मारेंगे.'अब्दुल्लाही ने यह भी आरोप लगाया कि इस्लामी शासन प्रदर्शनकारियों पर की गई अपनी बर्बरता और उन्हें दी गई यातनाओं के सबूत मिटाने की कोशिश करता है. उन्होंने कहा कि कई मामलों में शव परिजनों को नहीं सौंपे जाते, बल्कि उन्हें जला दिया जाता है, ताकि अत्याचार के निशान दिखाई न दें.

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इराक से आए हजारों शिया लड़ाकों की तैनाती

ब्रिटेन के अखबार 'द गार्डियन' (The Guardian) ने भी ऐसी ही एक घटना की रिपोर्ट की है, जिसमें ईरान के केर्मानशाह शहर में हिरासत के दौरान 16 वर्षीय लड़की समेत कई महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन हिंसा की गई. कुर्दिस्तान ह्यूमन राइट्स नेटवर्क के रेबिन रहमानी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने डंडों से उन्हें पीटा और उनके शरीर के संवेदनशील हिस्सों को गलत तरीके से छुआ. जनवरी में ईरान भर में फैले प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सरकार ने इंटरनेट और कम्युनिकेशन सेवाएं बंद कर दीं. इसके बाद IRGC की बसीज मिलिशिया (Basij Militia)  और यहां तक कि इराक से आए हजारों शिया लड़ाकों को तैनात किया गया. 

इस्लामी शासन की बर्बर कार्रवाई में 5000 मौतें

अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को ईरान में इस्लामी शासन के तख्ता पलट की 'विदेशी साजिश' बताया. ईरान में सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार 3,117 लोग मारे गए, जबकि रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह संख्या कम से कम 5,000 बताई गई. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हजारों मामलों की अब भी जांच चल रही है. माइकल अब्दुल्लाही का दावा है कि ईरान के लोग खामेनेई शासन की इतनी बर्बर कार्रवाई के बावजूद हार मानने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'मैं रोज ईरान के लोगों से बात करता हूं. हर किसी ने किसी न किसी अपने को खोया है. पूरा देश शोक में डूबा है. यह किसी कब्रिस्तान जैसा लगता है, लेकिन लोग अब भी कह रहे हैं कि वे झुकेंगे नहीं.'

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