अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से वापसी का रास्ता खतरनाक नजर आ रहा है. ईरान की सेना यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4' के तहत अपनी 91वीं लहर (Wave 91) शुरू कर दी है. इस बार ईरान ने सीधे उन ठिकानों को निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैनिक और उनके सबसे घातक जंगी जहाज तैनात हैं. खबर है कि खाड़ी के अलग-अलग इलाकों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन्स से ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान ने यूएई में मौजूद अमेरिकी सैनिकों पर सीधे हमले का दावा किया है. बताया जा रहा है कि एक बेस के बाहर खड़े अमेरिकी फाइटर पायलट्स और इंजीनियरों के ग्रुप पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. इस हमले में कई अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की खबर है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. इतना ही नहीं, कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर तैनात अमेरिकी ड्रोन यूनिट्स को भी ईरान ने अपने निशाने पर लिया है.
USS अब्राहम लिंकन पर मिसाइल अटैक
ईरान के हौसले इतने बुलंद हैं कि उसने हिंद महासागर में तैनात अमेरिका के सबसे बड़े और ताकतवर जंगी जहाज 'USS अब्राहम लिंकन' को भी नहीं बख्शा. ईरान का दावा है कि उसने इस विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर पर चार क्रूज मिसाइलें दागी हैं. अगर यह दावा सच निकलता है, तो यह अमेरिका के लिए बहुत बड़ा झटका होगा क्योंकि 'USS अब्राहम लिंकन' को समंदर की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है.
ईरान ने इस पूरे मिशन में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स का एक साथ इस्तेमाल किया है. हालांकि, अभी तक अमेरिका या किसी और देश ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है. अक्सर युद्ध के समय ऐसे बड़े दावे डराने के लिए भी किए जाते हैं, लेकिन जिस तरह से ईरान ने एक के बाद एक लोकेशन के नाम लिए हैं, उसने दुनिया भर के जानकारों की नींद उड़ा दी है.
अब सबकी नजरें अमेरिका के जवाब पर टिकी हैं. अगर वाकई अमेरिका के इतने बड़े युद्धपोत और सैनिकों को नुकसान पहुंचा है, तो इससे मिडिल ईस्ट के हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं. फिलहाल दुनिया भर के जानकार इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि अमेरिका इन दावों पर क्या प्रतिक्रिया देता है. क्या अमेरिका इस पर कोई जवाबी कार्रवाई करेगा या मामला बातचीत से सुलझेगा, यह आने वाले वक्त में साफ हो जाएगा. फिलहाल तो यह साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव एक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है.