मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उसने साफ कहा है कि वह रिहायशी इलाकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर किए जा रहे हमलों का समर्थन नहीं करता. इस बयान को ईरान के खिलाफ चीन की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है.
बीजिंग में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन खाड़ी देशों पर किए जा रहे हमलों से सहमत नहीं है और रिहायशी और गैर-सैन्य ठिकानों पर किसी भी तरह के अंधाधुंध हमलों की निंदा करता है.
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इसी दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी कहा कि ईरान को लेकर बढ़ते संकट को रोकने की कुंजी अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों को रोकने में है. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध का कोई कानूनी आधार नहीं है, और इसे लंबा खींचने से केवल बेवजह लोगों की जानें जाएंगी. चीन ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार जिम्मेदार रुख अपनाने की जरूरत पर जोर दिया.
इस बीच क्षेत्र में संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है. ईरान के सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी के मुताबिक, ईरान ने इजरायल पर अब तक का सबसे भारी और तीव्र मिसाइल हमला किया है. हालांकि इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया.
एक समुद्री सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट में एक कार्गो जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया, जिससे जहाज में आग लग गई और क्रू को जहाज खाली करना पड़ा. वहीं संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक कंटेनर जहाज पर भी हमला हुआ, हालांकि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं.
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इस दौरान कतर की राजधानी दोहा में कई विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं. वहीं इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत और उसके दक्षिणी शहरों में हवाई हमले किए हैं, जिन्हें ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया बताया जा रहा है. लेबनान के अधिकारियों के मुताबिक इस संघर्ष के बाद से अब तक करीब 7 लाख 60 हजार लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं.
उधर अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान की 16 माइन बिछाने वाली नौकाओं को नष्ट कर दिया है. यह कार्रवाई उस चेतावनी के बाद हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.