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27 प्रांत, 280 जगहों पर प्रोटेस्ट, इंटरनेट बंद... ईरान में कितने बड़े हैं खामेनेई विरोधी प्रदर्शन? आंकड़ों में देखें

ईरान में इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया है. सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अगुवाई वाली इस्लामिक सरकार को हटाने की मांग करते हुए प्रदर्शन कई शहरों में फैल गए. तेहरान के पश्चिम में कराज के पास गाड़ियों में आग लगा दी गई. बाद में ईरानी मीडिया में ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें गोलियों की आवाज़ के बाद प्रदर्शनकारी भागते हुए दिखे.

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तेहरान से तबरिज़ तक गुस्सा: कैसे पूरे ईरान में फैल गया विरोध. (Image: AFP/Reuters/File)
तेहरान से तबरिज़ तक गुस्सा: कैसे पूरे ईरान में फैल गया विरोध. (Image: AFP/Reuters/File)

ईरान में जो विरोध प्रदर्शन पहले छिटपुट तौर पर शुरू हुए थे, अब वे तेजी से हिंसक रूप लेते जा रहे हैं. राजधानी तेहरान से शुरू होकर ये प्रदर्शन अब देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक फैल चुके हैं. आठ जनवरी तक ईरान के 27 प्रांतों में कम से कम 156 प्रदर्शन घटनाएं दर्ज की गईं. ये संख्या एक दिन पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी है और हालात थमते नहीं दिख रहे. 

महसा अमीनी की मौत के बाद 2022 में हुए आंदोलन के बाद यह ईरान का सबसे बड़ा और हिंसक विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है. 22 साल की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत ने तब पूरे देश में महीनों तक सरकार विरोधी आंदोलन खड़ा कर दिया था. 

तो सवाल है इस बार आंदोलन कितना बड़ा है? विज़ुअल वेरिफिकेशन और ओपन-सोर्स डेटा के जरिए इंडिया टुडे ने ईरान में फैलते विरोध प्रदर्शनों की रफ्तार और दायरा मैप किया है. इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वार (ISW) के डेटा के मुताबिक, 1 जनवरी से 8 जनवरी के बीच प्रदर्शन तेजी से बढ़े हैं.

गुरुवार को हालात और बिगड़ गए, जब ईरान में इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया. सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अगुवाई वाली इस्लामिक सरकार को हटाने की मांग करते हुए प्रदर्शन कई शहरों में फैल गए.

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तेहरान के पश्चिम में कराज के पास गाड़ियों में आग लगा दी गई. बाद में ईरानी मीडिया में ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें गोलियों की आवाज के बाद प्रदर्शनकारी भागते हुए दिखे.

कर्मान प्रांत के आजादी स्क्वायर में प्रदर्शनकारियों ने इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक पूर्व अधिकारी की मूर्ति को आग के हवाले कर दिया. ये अधिकारी सरकार समर्थकों के बीच हीरो माना जाता है.

जैसे-जैसे प्रदर्शन बढ़े, वैसे-वैसे इंटरनेट कनेक्टिविटी अचानक गिर गई. नेट ब्लॉक्स नाम की इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था के मुताबिक, गुरुवार दोपहर के बाद ईरान लगभग पूरी तरह ऑफलाइन हो गया. 

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया है कि हाल के दिनों में कम से कम 28 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं.
वहीं मानवाधिकार उल्लंघन पर नजर रखने वाली तीन अन्य संस्थाओं  HRANA (वॉशिंगटन), ईरान ह्यूमन राइट्स (नॉर्वे) और हेन्गॉ ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स का दावा है कि मरने वालों की संख्या 40 से ज्यादा है.

ओपन-सोर्स मिलिट्री ऑब्जर्वर मार्क पाइरुज के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की संख्या 7,893 से बढ़कर 11,141 तक पहुंच गई है.

कैप्शन: X पर मार्क पाइरुज़ द्वारा विज़ुअल एनालिसिस के आधार पर प्रदर्शनकारियों की अनुमानित संख्या

ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को तेहरान से शुरू हुए थे और अब तक ईरान के 31 में से 27 प्रांतों के 280 से ज्यादा स्थानों तक फैल चुके हैं.
खामेनेई ने शनिवार को कहा कि प्रदर्शनकारियों की शिकायतें वाजिब हैं लेकिन साथ ही आरोप लगाया कि 'बाहरी ताकतें' हालात को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं.

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शुरुआत में ये विरोध प्रदर्शन ईरान की पारंपरिक मंडियों (बाजारों) से जुड़े व्यापारियों ने किए थे. तेहरान, तबरीज, इस्फहान, मशहद और कर्मान जैसे शहरों में दुकानदारों ने गिरती अर्थव्यवस्था और कमजोर होती मुद्रा के खिलाफ आवाज उठाई थी.

ISW का कहना है कि ईरानी सरकार हालात संभालने के लिए आर्थिक सुधारों का रास्ता अपना सकती है. बुनियादी जरूरतों पर सब्सिडी और सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने जैसे कदमों को मंजूरी दी गई है. हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि ये कदम उन लोगों को शांत कर पाएंगे या नहीं, जो असल आर्थिक बदलाव की मांग कर रहे हैं.

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