भारत के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा देश में धार्मिक स्थलों को लेकर दिए गए बयान को सिरे से खारिज कर दिया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है. मंत्रालय ने पाकिस्तान की टिप्पणियों को बेबुनियाद और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान का मानवाधिकार रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है और इसको लेकर पूरी दुनिया में चिंता और आलोचना होती रही है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और उनके साथ भेदभाव के लिए जाना जाता है. ऐसे में भारत पर टिप्पणी करना पूरी तरह हास्यास्पद है.
रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान राष्ट्रपति की टिप्पणियां दरअसल वहां की नफरत और कट्टरता पर आधारित राष्ट्रीय नीतियों को दर्शाती हैं. विदेश मंत्रालय ने यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान पर दी, जिसमें उन्होंने भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों को कथित खतरे को लेकर चिंता जताई थी. जरदारी ने दावा किया था कि इस तरह की घटनाएं भारत में अराजकता पैदा कर सकती हैं. भारत ने इन दावों को अपुष्ट और भ्रामक जानकारी पर आधारित बताया.
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामलों, खासकर अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर बिना तथ्यों के टिप्पणी की हो. मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में भी पाकिस्तान के उन आरोपों को खारिज किया था, जिनमें भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कथित दुर्व्यवहार की बात कही गई थी. उस समय भारत ने कहा था कि पाकिस्तान अपने यहां विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे भयावह और व्यवस्थित उत्पीड़न से ध्यान हटाने के लिए भारत पर उंगली उठा रहा है.
दरअसल पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भारत में कथित तौर पर धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ध्यान देने की अपील की थी. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान को अपने हालात सुधारने की सलाह दी थी. इसके अलावा अप्रैल 2025 में भारत ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर पाकिस्तान की आलोचना को भी कड़े शब्दों में खारिज किया था. उस समय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत की संसद द्वारा पारित कानूनों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है और उसे दूसरों को सीख देने के बजाय अपने यहां अल्पसंख्यकों की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए.