अमेरिका और इजरायल से चल रही जंग के बीच ईरान ने भारत को चिकित्सा संबंधी मदद के लिए आभार जताते हुए एक पोस्ट किया और फिर तुरंत कुछ घंटे में ही उसे डिलीट भी कर दिया है. सोशल मीडिया पर यह पोस्ट भारत स्थित ईरानी दूतावास की तरफ से किया गया जिसमें कहा गया कि भारत के सम्मानित लोगों की तरफ से चिकित्सा सहायता की पहली खेप बुधवार को ईरान पहुंच गई. लेकिन अब यह पोस्ट डिलीट हो चुकी है. बताया जा रहा है कि इस वक्त भारत सरकार की तरफ से ईरान को किसी तरह की मदद नहीं भेजी जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, अभी तक भारत सरकार की तरफ से ईरान को किसी तरह की मदद नहीं भेजी गई है. ईरानी दूतावास ने भी अपनी पोस्ट में कहा था कि मदद भारत के लोगों की तरफ से है, इसमें भारत सरकार का कहीं जिक्र नहीं था.
भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया था कि यह मदद ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंपी गई है. पोस्ट में दूतावास ने भारत के लोगों के प्रति आभार जताया.
पोस्ट में कहा गया, 'भारत के सम्मानित लोगों की ओर से भेजी गई चिकित्सा सहायता की पहली खेप पहुंच चुकी है. हम भारत के उदार लोगों का दिल से धन्यवाद करते हैं.' ईरानी दूतावास ने पोस्ट में एक वीडियो भी अटैच किया था जिसमें ईरान को भेजी जा रही मेडिकल सहायता दिख रही थी. इस वीडियो में दिख रहे डिब्बों पर भी लिखा था- भारत की जनता द्वारा ईरान के इस्लामी गणराज्य के रेड क्रिसेंट सोसाइटी को दान की गई चिकित्सा सहायता.
भारत में ईरानी दूतावास ने जंग से जूझते ईरान की मदद के लिए डोनेशन कैंपेन भी शुरू किया है. दूतावास ने एक्स पर एक मैसेज पिन किया है जिसमें डोनेशन के लिए भारतीयों का आभार जताया गया है. इस पोस्ट में दूतावास ने अकाउंट का नाम, अकाउंट नंबर और IFSC कोड भी दिया है ताकि लोग अपना डोनेशन भेज सकें.
अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जंग में ईरान को हो रहा भारी नुकसान
ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने हमले शुरू किए थे जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता मारे गए. हाल ही में इजरायली हमलों में ईरान के टॉप अधिकारी और खामेनेई के जाने के बाद सबसे मजबूत नेता माने जा रहे अली लारिजानी भी मारे गए.
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरेनी के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से ईरान में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 7,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर 18 हमलों की पुष्टि की है और बताया कि आठ मेडिकल कर्मचारियों की मौत हुई है.
WHO के अधिकारियों का कहना है कि चुनौतियों के बावजूद ईरान की स्वास्थ्य व्यवस्था काफी हद तक काम कर रही है. WHO की क्षेत्रीय निदेशक हनान बाल्खी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए कहा, 'प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं और स्वास्थ्य ढांचा मजबूत हैं और ईरान फिलहाल घायलों का इलाज कर पा रहा है.'
WHO ने यह भी कहा कि हालात बिगड़ने पर इमर्जेंसी सप्लाई पहुंचाने के लिए उसके पास वैकल्पिक योजनाएं तैयार हैं. अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि ईरान के तेल ठिकानों में लगी आग से उठने वाले धुएं के कारण बनने वाली जहरीली 'काली बारिश' स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है. इससे सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती हैं.