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India-EU ट्रेड डील से अमेरिका को लगी मिर्ची, ट्रंप के मंत्री बोले- खुद अपने खिलाफ वॉर की फंडिंग कर रहा यूरोप

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर अमेरिका नाराज दिख रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी का कहना है कि यूरोप भारत से ट्रेड कर रूस-यूक्रेन जंग को अप्रत्यक्ष रूप से फंड कर रहा है. आज दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में FTA, डिफेंस और मोबिलिटी डील पर साइन होने की उम्मीद है.

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भारत-यूरोपीय संघ के बीच आज ट्रेड डील साइन होने जा रही है. (Photo: AP)
भारत-यूरोपीय संघ के बीच आज ट्रेड डील साइन होने जा रही है. (Photo: AP)

भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने जा रही ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) डील पर अमेरिका की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत-EU ट्रेड डील को लेकर तीखी बात बोलते हुए कहा कि "यूरोपीय देश खुद के खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहे हैं." रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका भारत पर "पुतिन की वॉर मशीन" को फंड करने का आरोप लगाता रहा है.
 
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, लेकिन इसके बावजूद यूरोपीय देशों ने भारत के साथ बड़ा ट्रेड एग्रीमेंट साइन कर लिया. उन्होंने कहा, "पिछले हफ्ते यूरोप ने भारत के साथ ट्रेड डील साइन की. यूरोपियंस असल में अपने ही खिलाफ जंग को फाइनेंस कर रहे हैं." उनका इशारा रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर था, जिसमें भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका पहले से तेवर दिखा रहा है.

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इस बयान के बीच भारत और यूरोपीय संघ आज यानी 27 जनवरी 2026 को दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में कई बड़े समझौतों की औपचारिक घोषणा करने जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में इन समझौतों पर मोहर लगने की उम्मीद है.

18 साल भारत-EU में डील पर चली बातचीत

करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद यह FTA "मदर ऑफ ऑल डील्स" माना जा रहा है. इस समझौते का मकसद भारत और EU के बीच व्यापार को नई ऊंचाई देना है. FTA के तहत ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे संवेदनशील सेक्टरों पर फोकस किया गया है. भारत चरणबद्ध तरीके या सीमित कोटा के तहत BMW, मर्सिडीज-बेंज और वोक्सवैगन जैसी यूरोपीय कारों पर टैरिफ घटा सकता है. इसके बदले EU भारतीय टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, जेम्स एंड ज्वेलरी और फुटवियर पर टैरिफ में बड़ी राहत देने को तैयार है.

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र कृषि और डेयरी उत्पाद डील का हिस्सा नहीं

भारत के जोर देने पर कृषि और डेयरी उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है, जबकि EU भारत के फाइनेंशियल और लीगल सर्विस सेक्टर में ज्यादा पहुंच चाहता है. FTA के अलावा भारत और EU के बीच सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी सहमति बनने जा रही है. यह समझौता समुद्री सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और आतंकवाद से निपटने जैसे क्षेत्रों को कवर करेगा. इसके साथ ही भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के बाद एशिया का तीसरा देश होगा, जो EU के साथ इस तरह की डिफेंस पार्टनरशिप करेगा.

मोबिलिटी एग्रीमेंट के तहत छात्रों, रिसर्चर्स, सीजनल वर्कर्स और हाई-स्किल प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान होगी. साथ ही भारत और EU सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी सहमत हैं, ताकि चीन और अमेरिका पर निर्भरता कम की जा सके. कुल मिलाकर, अमेरिका की नाराजगी के बावजूद भारत-EU समझौते को वैश्विक राजनीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

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