भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आख़िरकार मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को लेकर डील हो गई है. EU और भारत के बीच इसे लेकर लगभग 18 सालों से बातचीत चल रही थी जो कि अब सफल हो गई है. इसे मदर ऑफ ऑल डील भी कहा जा रहा है. इस समझौते को लेकर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक समझौते का औपचारिक घोषणा मंगलवार को की जाएगी, जबकि अंतिम हस्ताक्षर कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद किए जाएंगे.
सचिव राजेश ने बताया कि समझौता के टेक्स्ट की लीगल स्क्रबिंग में 5 से 6 महीनों का समय लगेगा, जिसके बाद दोनों पक्ष इस समझौते पर आधिकारिक दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करेंगे. सरकार का अनुमान है कि अगले साल से यह FTA लागू हो सकेगा.
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संतुलित और फ्यूचर ओरिएंटेड है. इसका मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा कर दोनों अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ना है.
विशेषज्ञों के अनुसार, इस डील से भारत के निर्यातकों, उद्योगों और निवेशकों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं यूरोपीय कंपनियों को भी भारत के तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार में प्रवेश के नए अवसर मिलेंगे.
वाणिज्य सचिव के मुताबिक, इस समझौते को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह दोनों पक्षों के हितों का समान रूप से ध्यान रखे और किसी पक्ष पर असंतुलित प्रभाव न पड़े. यह लॉन्ग टर्म आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा और वैश्विक सप्लाई चेन, निवेश और व्यापार के नए समीकरणों के बीच भारत-EU सहयोग को नई दिशा देगा.
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस FTA से दोनों की रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी और यह भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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शुल्क में कटौती और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा
FTA के तहत दोनों पक्ष 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमत हुए हैं. इसके साथ ही टेलीकॉम, ट्रांसपोर्टेशन, अकाउंटिंग और ऑडिटिंग जैसे सेवा क्षेत्रों में भी व्यापार को आसान बनाने के प्रावधान शामिल हैं.
मौजूदा समय में, EU द्वारा भारत से आने वाले सामान और लेबर इंटेंसिव सेक्टर पर लगभग 10 प्रतिशत आयात कर लगाया जाता है, जबकि सामान्य तौर पर ये शुल्क करीब 3.8 प्रतिशत है. वहीं, भारत की ओर से यूरोपीय वस्तुओं पर औसतन 9.3 प्रतिशत का शुल्क है, जिसमें ऑटोमोबाइल्स और उनके पार्ट्स पर सबसे अधिक (35.5 प्रतिशत), प्लास्टिक्स पर 10.4 प्रतिशत और रसायन तथा फार्मास्यूटिकल्स पर 9.9 प्रतिशत शुल्क है.
मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के अंतर्गत दोनों पक्ष 90 प्रतिशत से अधिक सामानों पर अपने आयात शुल्क को कम या समाप्त कर देते हैं. साथ ही, यह सेवा क्षेत्रों जैसे टेलीकॉम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन, अकॉन्टिंग और ऑडिटिंग में भी सरल नियम लागू करता है, जिससे व्यापार में वृद्धि होती है. 2014 से आंध्र प्रदेश सरकार ने ऑस्ट्रेलिया, यूके, ओमान, न्यूजीलैंड, यूएई, EFTA और मॉरीशस के साथ सात व्यापार संधियों को अंतिम रूप दिया है.
अमेरिका के उच्च शुल्क का असर होगा कम
यह समझौता अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क के प्रभाव को भी संतुलित करेगा, जिसने वैश्विक व्यापार प्रवाह को बाधित किया है. भारत को अमेरिका से 50 प्रतिशत तक के शुल्क का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए अपने व्यवसाय को डायवर्स बनाने का अवसर मिलेगा और चीन पर निर्भरता कम होगी.
निवेश संरक्षण और जीआई पर बातचीत जारी
भारत-ईयू FTA में निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतों (GI) पर भी बातचीत जारी है. यह समझौता 24 अध्यायों में फैला है, जिसमें वस्त्र, सेवा और निवेश शामिल हैं. 2024-25 में भारत-ईयू के बीच वस्त्र व्यापार का मूल्य 136.53 बिलियन यूएस डॉलर था, जिसमें भारत का निर्यात 75.85 बिलियन यूएस डॉलर और आयात 60.68 बिलियन यूएस डॉलर था, जिससे भारत का ट्रेड सरप्लस 15.17 बिलियन यूएस डॉलर रहा. सेवा व्यापार में भी 2024 में 83.10 बिलियन यूएस डॉलर का कारोबार हुआ.
भारत–ईयू व्यापार की मौजूदा स्थिति
ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और भारतीय कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा ईयू बाजार को जाता है. ईयू की अर्थव्यवस्था लगभग 20 ट्रिलियन यूएस डॉलर की है और इसकी आबादी 450 मिलियन से अधिक है. भारत की जनसंख्या 1.4 बिलियन से अधिक है, और 2024-25 में भारत के कुल निर्यात में सामान बिलियन यूएस डॉलर और सेवाएं 387.5 बिलियन यूएस डॉलर थीं, जबकि आयात समान 720 बिलियन यूएस डॉलर और सेवाएं 195 बिलियन यूएस डॉलर थी.
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भारत से यूरोपीय संघ को प्रमुख रूप से पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, मशीनरी, जैविक रसायन, लोहे-इस्पात और फार्मा उत्पाद निर्यात किए गए. वहीं, भारत ने ईयू से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमान, मेडिकल उपकरण, रत्न-आभूषण और प्लास्टिक जैसे सामानों का आयात किया.
सेवा क्षेत्र में भारत ने ईयू को व्यवसायिक सेवा, टेलीकॉम और सूचना प्रौद्योगिकी, और परिवहन सेवाएं प्रदान कीं. वहीं, भारत ने बौद्धिक संपदा सेवाएं, टेलीकॉम और आईटी सेवाओं का आयात किया.
रणनीतिक और आर्थिक मजबूती की दिशा में कदम
इस समझौते से दोनों देशों को आपसी वाणिज्यिक और सामरिक लाभ होंगे, जिससे भारत के वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा.