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पहले बलविंदर, फिर जसविंदर... अमेरिकी नागरिकता के लिए बदली पहचान, अब छिन सकती है US Citizenship

करीब 30 साल पहले अमेरिका में अलग पहचान से दाखिल हुए भारतीय मूल के एक व्यक्ति पर नागरिकता हासिल करने के लिए फर्जी जानकारी देने का आरोप लगा है. अमेरिकी सरकार ने अदालत में मुकदमा दायर कर उसकी नागरिकता रद्द करने की मांग की है.

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इस मामले की जांच USCIS और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने की है (Photo- ITG)
इस मामले की जांच USCIS और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने की है (Photo- ITG)

अमेरिका में एक दशक से भी पहले वहां की नागरिकता हासिल करने वाले भारतीय मूल के एक व्यक्ति के खिलाफ अमेरिकी सरकार ने फेडरल कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया है. इस शख्स पर आरोप है कि उसने दो दशकों से अधिक समय तक अपनी असली पहचान और पुराना इमिग्रेशन इतिहास छुपाकर रखा. अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के अनुसार, आरोपी ने दो अलग-अलग नामों से इमिग्रेशन फायदों के लिए आवेदन किया था. 

अब इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद उसकी अमेरिकी नागरिकता छीनी जा सकती है. दरअसल, ओरेगन जिले के अटॉर्नी कार्यालय ने 54 वर्षीय जसविंदर सिंह उर्फ बलविंदर सिंह के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की शिकायत दर्ज की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसने गलत जानकारी देकर और अपने पिछले इमिग्रेशन रिकॉर्ड को छुपाकर पहले ग्रीन कार्ड (स्थाई निवास) और बाद में अमेरिकी नागरिकता हासिल की.

1990 में किया था पहला आवेदन

अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, अगस्त 1990 में उसने बलविंदर सिंह के नाम से अमेरिका में इमिग्रेशन लाभ के लिए आवेदन किया था. हालांकि उसी वर्ष एक इमिग्रेशन जज ने उसका आवेदन खारिज कर दिया और उसे अमेरिका से डिपोर्ट करने का आदेश दिया.

उसने इस फैसले के खिलाफ अपील भी की, लेकिन वह भी खारिज हो गई. इसके बाद जुलाई 1993 में उसे इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया गया, लेकिन अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उसने ऐसा नहीं किया और अमेरिका में ही रह गया.

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नई पहचान के साथ फिर किया आवेदन

सरकारी शिकायत के अनुसार, नवंबर 1994 में उसने जसविंदर सिंह नाम से नया इमिग्रेशन आवेदन दाखिल किया. इस आवेदन में उसने न केवल जन्मतिथि बदली, बल्कि अमेरिका में प्रवेश से जुड़ी जानकारी भी अलग दी. सबसे अहम बात यह रही कि उसने अपने पहले इमिग्रेशन केस, डिपोर्टेशन ऑर्डर और बलविंदर सिंह नाम से जुड़े रिकॉर्ड का कोई उल्लेख नहीं किया.

यह आवेदन मंजूर हो गया और अगस्त 2003 में एक इमिग्रेशन जज ने उसे वह इमिग्रेशन लाभ प्रदान कर दिया, जिसके आधार पर वह वैध स्थायी निवासी बन गया. उस समय उसने शपथ लेकर यह भी प्रमाणित किया था कि आवेदन में दी गई सभी जानकारियां सही हैं.

2013 में मिली अमेरिकी नागरिकता

करीब दस साल बाद, 2013 में जसविंदर सिंह ने अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया. अदालत में दायर शिकायत के मुताबिक, उसने नागरिकता आवेदन पर भी शपथपूर्वक यह घोषणा की कि उसने अधिकारियों को दी गई सभी जानकारी और दस्तावेज सही हैं. इसके बाद अमेरिकी नागरिकता एवं इमिग्रेशन सेवा (USCIS) ने उसका आवेदन मंजूर कर लिया और वह अमेरिकी नागरिक बन गया.

अमेरिकी सरकार का कहना है कि जसविंदर सिंह की नागरिकता अवैध तरीके से हासिल की गई क्योंकि उसे शुरुआत में वैध रूप से स्थायी निवास का दर्जा ही नहीं मिलना चाहिए था. सरकार का आरोप है कि उसने अपनी असली पहचान छिपाई, पहले के डिपोर्टेशन आदेश की जानकारी नहीं दी, इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान झूठे बयान दिए और महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाकर नागरिकता प्राप्त की.

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क्या कहता है अमेरिकी कानून?

बता दें कि अमेरिकी इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के तहत यदि अदालत यह मान ले कि किसी व्यक्ति ने धोखाधड़ी, गलत जानकारी या तथ्यों को छिपाकर नागरिकता हासिल की है, तो उसकी नागरिकता रद्द करना अनिवार्य हो जाता है. यदि अदालत सरकार के पक्ष में फैसला सुनाती है तो जसविंदर सिंह अपनी अमेरिकी नागरिकता खो सकता है.

इस मामले की जांच USCIS और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने की है. यह मुकदमा आपराधिक नहीं बल्कि सिविल प्रकृति का है और इसका उद्देश्य केवल नागरिकता रद्द कराना है.

अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं. जसविंदर सिंह को अदालत में अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का पूरा अवसर मिलेगा.

हाल ही में 17 नागरिकों पर भी हुई कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सरकार ने किसी भारतीय मूल के नागरिक की नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई शुरू की हो. इसी महीने अमेरिकी न्याय विभाग ने 17 प्राकृतिक रूप से नागरिक बने लोगों के खिलाफ भी डीनैचुरलाइजेशन की कार्रवाई की घोषणा की थी. इनमें भारतीय मूल का एक सीईओ भी शामिल है, जिस पर फर्जी H-1B वीजा आवेदन दाखिल करने और नागरिकता आवेदन के दौरान गलत जानकारी देने का आरोप है.

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