
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन इस बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई बहस छिड़ गई है. ईरान ने संकेत दिया है कि वह अब जहाजों से सीधे "टोल" या "ट्रांजिट टैक्स" नहीं वसूलेगा. इसके बजाय वह ओमान के साथ मिलकर एक ऐसी व्यवस्था लागू करना चाहता है जिसके तहत जहाजों से नेविगेशन, सुरक्षा और अन्य सेवाओं के बदले फीस लिया जाएगा.
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि उनका देश किसी जहाज से गुजरने के अधिकार के बदले फीस नहीं लेना चाहता. उन्होंने साफ किया कि प्रस्तावित फीस उन सेवाओं के लिए होगा जो ईरान और ओमान मिलकर मुहैया कराएंगे. इनमें नेविगेशन सपोर्ट, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, समुद्री सुरक्षा और प्रदूषण की स्थिति में पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवाएं शामिल हैं.
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गरीबाबादी का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में स्थित है. इसलिए दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत इसके प्रबंधन का अधिकार हासिल है. उन्होंने यह भी माना कि नई व्यवस्था सभी देशों को पसंद नहीं आएगी, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप तैयार किया जा रहा है.

टोल नहीं सर्विस के बदले ली जाएगी फीस!
दरअसल, मई 2026 में ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसमें कुछ जहाजों, खासकर अमेरिका और इजरायल से जुड़े तेल टैंकरों पर 20 लाख डॉलर तक का ट्रांजिट शुल्क लगाने की बात कही गई थी. इस प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई. कई देशों ने इसे वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए खतरा बताया.
इसके बाद ईरान ने अपने रुख में बदलाव किया. अब तेहरान का कहना है कि यह "टोल सिस्टम" नहीं होगा, बल्कि सेवाओं के बदले लिया जाने वाला शुल्क होगा. आलोचकों का मानना है कि ईरान ने सिर्फ टोल का नाम बदलकर उसे "सर्विस फीस" या "नेविगेशनल फीस" बना दिया है. हालांकि, इस फीस की रकम कितनी होगी अभी ईरान की तरफ से इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है.
होर्मुज स्ट्रेट, यहां से होने वाली आवाजाही और टोल
जंग शुरू होने से पहले हर दिन 120 से 140 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे. इनमें लगभग आधे तेल टैंकर होते थे, जो रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचते थे. लेकिन मौजूदा तनाव के बाद इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है. ईरान के मुताबिक, हाल के दिनों में सिर्फ चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की इजाजत दी गई है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक जंग शुरू होने के बाद कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की रकम भी वसूली गई है और यह रकम चीनी करेंसी युआन में वसूली गई थी. इस बीच ईरान ने "पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी" (PGSA) नाम की नई संस्था भी बनाई है, जो होर्मुज स्ट्रेट में होने वाली गतिविधियों की निगरानी करेगी और रियल टाइम अपडेट जारी करेगी.
पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) का गठन पिछले महीने ही ईरान ने किया था. इसे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ा संगठन बताते हुए अमेरिका ने इसे प्रतिबंधों की लिस्ट में डाल दिया. अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि PGSA, IRGC के लिए वित्तीय मोर्चे के रूप में काम कर रहा है और इससे मिलने वाला राजस्व सीधे उसके सैन्य अभियानों को फंड करता है.
इसी आधार पर अमेरिका ने 27 मई 2026 को PGSA पर आतंकवाद-रोधी प्रतिबंध लगा दिए. इसके साथ ही शिपिंग कंपनियों, बीमा फर्म और बैंक इसके साथ लेन-देन करती है तो उनपर कार्रवाई की जाएगी.
होर्मुज स्ट्रेट में टोल वसूली पर ईरान का रुख!
ओमान इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा रहा है. अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के बावजूद ओमान ने ईरान के साथ संवाद बनाए रखा है. मस्कत का कहना है कि वह किसी टोल व्यवस्था का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि ऐसा ढांचा चाहता है जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की गाइडलाइंस के अनुरूप हो.

अमेरिका हालांकि इस मुद्दे पर सतर्क है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में कहा था कि दुनिया में शायद केवल ईरान और कुछ हद तक ओमान ही होर्मुज में ऐसी व्यवस्था के पक्ष में दिख रहे हैं. इसके बावजूद ओमान लगातार यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वह समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही के सिद्धांत का समर्थन करता है.
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का नया प्रस्ताव वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अमेरिका-ईरान वार्ता का एक अहम हिस्सा बन गया है. अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि यह "नेविगेशनल फीस" वास्तव में सेवा शुल्क साबित होती है या फिर टोल सिस्टम की नई पैकेजिंग.