अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने मेजबान ट्रंप की एक झूठ पकड़ ली. इमैनुएल मैक्रों ने तुरंत दोस्ताना अंदाज में ट्रंप का हाथ पकड़ा और दर्जनों पत्रकारों के सामने उनके झूठ को दुरुस्त किया. कसमसाये ट्रंप बोल तो कुछ नहीं सके बस झेंप कर रह गए.
अमेरिका की यात्रा पर वाशिंगटन पहुंचे इमैनुएल मैक्रों यूक्रेन जंग के कई मु्द्दों पर ट्रंप से इतर राय देते नजर आए.
गौरतलब है कि ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद मैक्रों पहले यूरोपियन राष्ट्रध्यक्ष हैं जो अमेरिका की यात्रा पर ट्रंप से मिलने गए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक की. बैठक से पहले ट्रंप और मैक्रों ने ओवल ऑफिस के बाहर काफी देर तक हाथ मिलाया, जिसे कई सोशल मीडिया यूजर्स ने "अजीब" बताया.
इसके बाद राष्ट्रपति और उनके फ्रांसीसी समकक्ष ने एक संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग की. इस दौरान जब ट्रंप पत्रकारों से बात कर रहे थे तो मैक्रों ने उन्हें टोका. और उनके एक कथित गलत दावे को सही किया. ये वाकया तब हुआ जब ट्रंप यूक्रेन फंडिंग पर पत्रकारों के सवाल का जवाब दे रहे थे.
ट्रम्प ने दावा किया कि यूरोप “यूक्रेन को पैसे उधार दे रहा है और अपना पैसा वापस ले रहा है.” जबकि ये अमेरिका है जिसने यूक्रेन को जंग लड़ने के लिए असली पैसा दिया है.
ट्रंप ऐसा बोल ही रहे थे कि मैक्रों ने फिर ट्रंप का हाथ पकड़कर उन्हें रोका और टोका, "नहीं, वास्तव में... सच कहूं तो हमने पेमेंट किया है, इस जंग में जितना खर्च हुआ है उसका 60% भुगतान किया है.” मैक्रों ने कहा कि अगर साफ साफ कहा जाए तो अमेरिका ने लोन, गारंटी, ग्रांट ने दिया लेकिन हमने असली पैसा दिया."
Trump gets fact checked by Macron
Trump: Europe is loaning the money to Ukraine, they get their money back
Macron: No. To be frank, we paid. We paid 60% of the total effort
— FactPost (@factpostnews)
बता दें कि ट्रंप यूक्रेन पर खर्च किए गए अमेरिकी पैसे को वसूलने की नीति पर काम कर रहे हैं. इसी पॉलिसी के तहत ट्रंप यूक्रेन के खनिजों को बेचने से होने वाली कमाई में हिस्सा चाहते हैं. ट्रंप का मानना है कि चूंकि अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने राष्ट्रपति जेलेंस्की को जंग का खर्चा दिया है, इसलिए अमेरिका इस कमाई का हकदार है.
ट्रंप ने मैक्रों के साथ मीटिंग के दौरान कहा कि उम्मीद है कि जेलेंस्की इस सप्ताह या अगले सप्ताह समझौते को अंतिम रूप देने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका आएंगे. ट्रम्प और उनकी टीम यूक्रेन के साथ खनिज राजस्व को बांटने के समझौते पर बातचीत कर रही है, ताकि पिछले बिडेन प्रशासन द्वारा रूस को पीछे हटाने के लिए हथियारों के रूप में कीव को भेजे गए कुछ धन को वापस लिया जा सके.
हालांकि यूक्रेन इस पर झिझक रहा है. जेलेंस्की ने पिछले सप्ताह युद्धकालीन सहायता के लिए वाशिंगटन को चुकाने के लिए यूक्रेन से खनिज संपदा में $500 बिलियन की अमेरिकी मांगों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अब तक उस राशि के आसपास भी आपूर्ति नहीं की है.
दोनों नेताओं के बीच एक दिन की मुलाकात के दौरान ट्रंप और मैक्रों ने वर्षों के अच्छे संबंधों के आधार पर मैत्रीपूर्ण तालमेल दिखाया. लेकिन मैक्रों ने स्पष्ट किया कि वे कुछ प्रमुख मुद्दों पर ट्रंप से असहमत हैं.
ट्रंप ने यूक्रेन में जल्द से जल्द युद्ध विराम की इच्छा व्यक्त की और कहा कि वह यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध विराम कराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक बार समझौता हो जाने पर वह पुतिन से मिलने मास्को जा सकते हैं.
दूसरी ओर, मैक्रों ने अधिक सोच-समझकर काम करने का आग्रह किया, जिसकी शुरुआत युद्धविराम से होगी. मैक्रों ने कहा कि शांति समझौते को सुरक्षा की गारंटी दी जानी चाहिए.
मैक्रों ने संवाददाताओं से कहा, "हम शांति चाहते हैं, वह शांति चाहते हैं हम शीघ्र शांति चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा समझौता नहीं चाहते जो कमज़ोर हो."
उन्होंने कहा कि किसी भी शांति समझौते का "मूल्यांकन, जांच और सत्यापन" किया जाना चाहिए.
ट्रंप ने पिछले सप्ताह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को तानाशाह कहने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तानाशाह कहने से इनकार कर दिया. मैक्रों ने कहा कि यह स्पष्ट है कि संघर्ष में रूस "कब्जा करने वाला" है. ये एक ऐसा विषय जिस पर ट्रंप पिछले सप्ताह बात करने से झिझक रहे थे.
ट्रम्प के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मैक्रों ने कहा, "राष्ट्रपति पुतिन ने शांति का उल्लंघन किया है."