अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां हर बयान अपने आप में एक नई रणनीति का संकेत बन रहा है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 मिनट के अपने संबोधन में जो कहा, उसने इस सवाल को और गहरा कर दिया है कि क्या जंग खत्म होने वाली है या अब और तेज होने वाली है?
अपने संबोधन की शुरुआत में ही ट्रंप ने जीत का दावा करते हुए कहा, "पिछले चार हफ्तों में हमारी सेना ने युद्ध के मैदान में तेज, निर्णायक और भारी जीत हासिल की है. ऐसी जीत, जैसी बहुत कम लोगों ने पहले देखी होगी." उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत को लगभग खत्म बताते हुए कहा, "आज की रात ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है. उनकी वायुसेना पूरी तरह बर्बाद हो गई है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कमांड और कंट्रोल लगातार तबाह किया जा रहा है."
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ट्रंप यहीं नहीं रुके. उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को भी गंभीर रूप से कमजोर कर दिया गया है. उनके शब्दों में, "मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की उनकी क्षमता को बड़े पैमाने पर खत्म कर दिया गया है." यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा, "युद्ध के इतिहास में कभी भी किसी दुश्मन को इतने कम हफ्तों में इतना विनाशकारी नुकसान नहीं झेलना पड़ा." लेकिन इसी संबोधन में कहानी का दूसरा पहलू भी सामने आया.
जहां एक तरफ ट्रंप जीत की तस्वीर पेश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने साफ संकेत दिया कि जंग अभी खत्म नहीं होने वाली. उन्होंने कहा, "आने वाले 2 से 3 हफ्तों में हम उन्हें बेहद कड़ा जवाब देंगे." उन्होंने यह भी इशारा किया कि जरूरत पड़ने पर ईरान के तेल ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है. यानी, सैन्य दबाव अभी और बढ़ सकता है.
ट्रंप ने कूटनीति का जिक्र करते हुए कहा, "पर्दे के पीछे बातचीत जारी है और रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं." लेकिन इसके साथ ही उनका यह बयान भी अहम रहा कि "हम काम पूरा करेंगे और बहुत तेजी से करेंगे." यह साफ संकेत है कि अमेरिका अभी अपने ऑपरेशन को अधूरा नहीं छोड़ना चाहता.
अपने संबोधन में ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, "अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत नहीं है." साथ ही उन देशों पर निशाना साधा जो अमेरिका का साथ नहीं दे रहे, उन्हें उन्होंने "गद्दार" तक कह दिया. ट्रंप का दावा था कि "जैसे ही यह संघर्ष खत्म होगा, होर्मुज अपने आप खुल जाएगा." इस बीच उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अब दबाव में है. उनके मुताबिक, "ईरान ने सीजफायर की मांग की है."
हालांकि जमीनी हालात इस दावे की पुष्टि नहीं करते, लेकिन ट्रंप का यह बयान उनकी रणनीतिक स्थिति को दिखाता है. एक तरफ दबाव, दूसरी तरफ बातचीत. ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अमेरिका अपने लगभग सभी सैन्य लक्ष्यों के करीब पहुंच चुका है. उन्होंने कहा, "हम अपने मिशन के अंतिम चरण में हैं," उन्होंने कहा. साथ ही दोहराया, "ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा."
लेकिन सबसे अहम बात उनके उस संकेत में छिपी थी, जिसमें उन्होंने कहा कि कई जंगें लंबी चलती हैं. यह बयान बताता है कि अमेरिका खुद भी इस संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रहा कि यह संघर्ष जल्दी खत्म नहीं होगा. मसलन, ट्रंप का 20 मिनट का संबोधन एक साथ दो तस्वीरें पेश करता है. एक तरफ "जीत" का दावा और दूसरी तरफ "जंग जारी रहने" का संकेत. यही वजह है कि सवाल अभी भी वही है.. वॉर या नो वॉर?