अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के बाद अब क्यूबा को संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा बनाने को लेकर बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने क्यूबा सरकार के संकट में होने की बात कही है और संकेत दिया है कि अमेरिका क्यूबा का फ्रेंडली टेकओवर कर सकता है. उन्होंने कहा कि क्यूबा सरकार वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रही है और ये बदलाव निर्वासित क्यूबाई लोगों के लिए फायदेमंद होगा. ट्रंप ने इस प्रक्रिया के विस्तार पर कोई विवरण नहीं दिया, लेकिन यह कदम अमेरिका और क्यूबा के बीच दशकों से चले आ रहे तनावों में बदलाव ला सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस से टेक्सास रवाना होते वक्त क्यूबा के साथ जारी बातचीत की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'क्यूबा सरकार हमसे बात कर रही है. वह बहुत बड़ी मुश्किल में हैं, जैसा आप जानते हैं. उनके पास पैसे नहीं हैं, अभी उनके पास कुछ भी नहीं है. लेकिन वो हमसे बात कर रहे हैं और शायद हम क्यूबा का फ्रेंडली टेकओवर कर लें.'
क्या है ट्रंप के बयान का मतलब?
ट्रंप ने दोहराया, 'हम बहुत अच्छी तरह से क्यूबा का फ्रेंडली टेकओवर कर सकते हैं.' हालांकि, उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि 'फ्रेंडली टेकओवर' से उनका मतलब क्या है- क्या ये आर्थिक सहायता, राजनीतिक बदलाव, या कोई अन्य समझौता है. उन्होंने बातचीत की प्रकृति या दायरे पर भी कोई विस्तार नहीं दिया.
निर्वासितों के लिए अच्छी खबर
ट्रंप का मानना है कि इस संभावित बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा जो क्यूबा छोड़कर अमेरिका में बस गए थे.
उन्होंने कहा कि हमारे यहां ऐसे कई लोग रह रहे हैं जो वापस क्यूबा जाना चाहते हैं और वे मौजूदा घटनाक्रम से बहुत खुश हैं. राष्ट्रपति ने पुरानी कड़वाहट का जिक्र करते हुए कहा कि वे बचपन से क्यूबा के साथ रिश्तों की उलझनों के बारे में सुनते आ रहे हैं, लेकिन अब कुछ बहुत सकारात्मक हो सकता है.
क्यूबा-वाशिंगटन के रिश्ते
बता दें कि अमेरिका और क्यूबा के संबंध दशकों से राजनीतिक शत्रुता और आर्थिक प्रतिबंधों से भरे रहे हैं. ट्रंप के ये ताजा कमेंट्स प्रशासन की उस विदेश नीति का हिस्सा हैं जो पश्चिमी गोलार्ध में नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है. हालांकि, 'फ्रेंडली टेकओवर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल राजनयिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. ट्रंप ने इसे क्यूबा के लोगों और वहां से निकाले गए लोगों के हित में बताया है.