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'डील नहीं हुई तो महायुद्ध होगा', ईरान पर ट्रंप का बड़ा बयान, अरब देशों से की ये अपील

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अमेरिकी की बातचीत बेहद सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है. यह या तो ऐतिहासिक शांति समझौते में बदलेगी या फिर पहले से ज्यादा बड़े युद्ध का कारण बनेगी. ट्रंप ने कई मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौतों में शामिल होने की अपील भी की है.

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मिडिल ईस्ट होगा सबसे ताकतवर क्षेत्र, अब्राहम समझौतों पर ट्रंप का बड़ा प्लान. (File Photo: ITG)
मिडिल ईस्ट होगा सबसे ताकतवर क्षेत्र, अब्राहम समझौतों पर ट्रंप का बड़ा प्लान. (File Photo: ITG)

ईरान के साथ जारी बातचीत को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ बातचीत बहुत अच्छे से आगे बढ़ रही है. उनका मानना है कि ये या तो सभी के लिए बहुत बड़ी डील साबित होगी या फिर दुनिया एक बार फिर युद्ध के मैदान में लौट जाएगी.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "यह या तो सभी के लिए बेहद बड़ी डील साबित होगी, या फिर कोई समझौता नहीं होगा. ऐसी स्थिति में दुनिया फिर युद्ध के मैदान में लौट जाएगी. पहले से कहीं बड़े पैमाने पर गोलीबारी शुरू हो सकती है, जिसे कोई भी नहीं चाहता." उन्होंने कहा कि अईरान के साथ समझौते की लगातार कोशिश हो रही है.

इसी सिलसिले में राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को कई मुस्लिम देशों के शीर्ष नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ संभावित समझौते और मध्य पूर्व में स्थिरता को लेकर कई देशों के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है. इसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की, बहरीन और यूएई के कई नेता शामिल थे.

इन नेताओं में सऊदी अरब के मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद, संयुक्त अरब अमीरात के मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान, कतर के अमीर तमीम बिन हमद बिन खलीफ़ा अल थानी, प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम बिन जाबेर अल थानी और मंत्री अली अल-थवादी शामिल थे. 

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इसके अलावा पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से भी बातचीत हुई. ट्रंप ने इन सभी नेताओं से खास आग्रह किया है.

ट्रंप ने कहा कि वे अब्राहम समझौतों पर हस्ताक्षर करें. अमेरिका द्वारा इस जटिल स्थिति को सुलझाने के लिए किए गए तमाम प्रयासों के बाद यह जरूरी है कि सभी देश एक साथ इस समझौते का हिस्सा बनें. उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन पहले से ही इस समझौते का हिस्सा हैं.

ट्रंप ने कहा, "हो सकता है कि एक या दो देशों के पास ऐसा न करने का कोई कारण हो, और उसे स्वीकार कर लिया जाएगा, लेकिन ज्यादातर देशों को ईरान के साथ इस समझौते को, अन्यथा की तुलना में, कहीं ज्यादा ऐतिहासिक घटना बनाने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम होना चाहिए."

उन्होंने दावा किया कि अब्राहम समझौते में शामिल देशों को वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि युद्ध के बावजूद इन देशों ने कभी इस समझौते से बाहर निकलने की बात तक नहीं की है. उन्होंने कहा, "अब्राहम समझौते सभी के लिए बहुत अच्छे रहे हैं.''

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ट्रंप ने इसे दुनिया का सबसे अहम और प्रतिष्ठित समझौता बताया. उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत सऊदी अरब और कतर द्वारा तत्काल हस्ताक्षर से होनी चाहिए. बाकी देशों को भी उनका अनुसरण करना चाहिए. वे ईरान को भी अब्राहम समझौतों का हिस्सा बनाए जाने का समर्थन करेंगे.

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