अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्तों से जारी टकराव खत्म करने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे हैं, जहां शांति वार्ता होने वाली है. ईरानी प्रतिनिधियों में वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं. वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं.
हालांकि, दोनों के बीच सीजफायर को लेकर सीधी बातचीत पर अनिश्चितता बनी हुई है. इसी बीच मेजबान देश पाकिस्तान की भागीदारी के साथ त्रिपक्षीय बैठक की संभावना उभरकर सामने आई है, हालांकि यह कुछ शर्तों पर निर्भर है. अब सवाल है कि ये शर्तें क्या हैं? फिलहाल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात कर चुके हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारी एक तरफ अमेरिकी प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर ईरानी प्रतिनिधियों के साथ अलग से संपर्क बनाए हुए हैं. अल जजीरा (Al Jazeera) की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान तभी अमेरिका और पाकिस्तान के साथ त्रिपक्षीय वार्ता में शामिल होगा, जब उसकी कुछ प्रमुख शर्तें पूरी होंगी. इन शर्तों में सबसे अहम है लेबनान में इजरायली हमलों का पूरी तरह रुकना और वहां स्थायी युद्धविराम लागू होना.
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इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि कतर और अन्य विदेशी बैंकों में ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज किया जाए. अल जजीरा ने इस्लामाबाद में अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि फिलहाल पाकिस्तान और अमेरिका व पाकिस्तान और ईरान के बीच अलग-अलग बातचीत हो रही है, इस स्तर पर कोई प्रत्यक्ष त्रिपक्षीय भागीदारी नहीं है. दोनों पक्षों की प्रमुख मांगों और शर्तों के पूरा होने पर वार्ता त्रिपक्षीय प्रारूप में आगे बढ़ सकती है.
पाकिस्तान की ओर से इस वार्ता में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और गृह मंत्री मोहसिन नकवी बतौर प्रतिनिधि शामिल हैं. पाकिस्तान के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं और वह ईरान का पड़ोसी भी है, इसलिए वह दोनों देशों के बीच एक उपयुक्त मध्यस्थ की भूमिका में है. हालांकि, ईरान की शर्तें पूरी हुए बिना किसी ठोस बातचीत की शुरुआत मुश्किल मानी जा रही है.