दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन जलमार्गों में शामिल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है, इस समय भीषण डिजिटल ब्लैकआउट का सामना कर रहा है. अत्याधुनिक जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग के कारण इस जलमार्ग के रास्ते टैंकरों की आवाजाही अस्त-व्यस्त हो गई है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद यह इलाका इलेक्ट्रॉनिक वॉर जोन में बदल गया है.
आमतौर पर वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है, लेकिन वर्तमान में जहाजों की आवाजाही तेजी से घट गई है. जहाज कप्तानों का कहना है कि नेविगेशन सिस्टम गलत लोकेशन दिखा रहे हैं. कभी टैंकर सूखी जमीन पर चलते दिखते हैं, तो कभी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों के पास लंगर डाले.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास टैंकर जाम क्यों लगा?
पानी के जहाज अपनी स्थिति जानने के लिए GPS और दूसरों को लोकेशन बताने के लिए AIS पर निर्भर रहते हैं. यहां दो तरह से हमले हो रहे हैं- पहला, जैमिंग, जिसमें ग्राउंड स्टेशन पावरफुल रेडियो नॉइज भेजकर सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल को दबा देता है. दूसरा, स्पूफिंग, जिसमें असली जैसे दिखने वाले नकली कोऑर्डिनेट्स भेजे जाते हैं. मैरीटाइम ट्रैकिंग फर्म Kpler के मुताबिक 28 फरवरी से मैप पर जहाजों के डिजिटल फुटप्रिंट अचानक बेतरतीब हो गए.
Strait of Hormuz traffic drops sharply amid regional escalation
— MarineTraffic (@MarineTraffic) March 2, 2026
Vessel activity in the Strait of Hormuz has shifted materially following recent US strikes on Iran and the subsequent regional escalation. According to real-time traffic analysis, transits through the chokepoint… pic.twitter.com/COoh0W9jfk
कौन सी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा ईरान?
विश्लेषकों के अनुसार ईरानी सेना ने फारस की खाड़ी में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम तैनात किए हैं. बंदर अब्बास के पास कोबरा V8 और सैय्यद-4 सिस्टम लगाए गए हैं. कोबरा V8 ट्रक-माउंटेड प्लेटफॉर्म है जो 250 किमी तक रडार और सैटेलाइट सिग्नल जाम कर सकता है, जबकि सैय्यद-4 जो प्राथमिक तौर पर एक मिसाइल सिस्टम है, उसके स्पेशल रडार कम्पोनेंट का उपयोग गैर-घातक तरीके से नेविगेशन बाधित करने में हो रहा है. नतीजा- एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक ब्लैकआउट.
When GPS lies, ships stop moving.
— Kpler (@Kpler) March 1, 2026
GNSS spoofing, the deliberate manipulation of satellite navigation signals, has been confirmed in the Gulf. Ships can’t trust where they are, so many are choosing not to go at all.
The result: a sharp drop in vessel traffic through the Strait… pic.twitter.com/RQrmvbjdBg
इस संकरे जलमार्ग में 1100 से अधिक टैंकर इस डिजिटल वॉरफेयर में फंस गए हैं. बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अधिकतम चौड़ाई 33 किलोमीटर है.

जहाजों की सुरक्षा पर असर
इस भीड़भाड़ वाले जलक्षेत्र में सैटेलाइट नेविगेशन फेल होने से टकराव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. पानी पर तैरने वाले विशाल टैंकर, सड़कों पर चलने वाले टैंकर्स की तरह तुरंत ब्रेक लगाकर रुक या मुड़ नहीं सकते. डिजिटल डेटा भरोसेमंद न होने पर जहाजों के चालक दल को मैनुअल रडार और विजुअल सिम्बल पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है.

ओमान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 1 मार्च को Skylight नाम का ऑयल टैंकर टकराव का शिकार हुआ. इसके 20 सदस्यीय चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा, जिसमें 15 भारतीय शामिल थे. यह संकट दिखाता है कि अदृश्य रेडियो तरंगें कैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना सकती हैं.