जापान की नई रक्षा नीति की घोषणा के बीच चीन ने आक्रमक रुख अपनाते हुए प्रशांत क्षेत्र में अपने पोत भेजे हैं. बता दें कि गुरुवार को चीनी नौसैनिक पोतों का एक बेड़ा जापान के पास प्रशांत क्षेत्र में पहुंचा है. प्रशांत क्षेत्र में चीन की ओर से पोत भेजने का ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब जापान ने शुक्रवार को ही नई और आक्रमक सुरक्षा नीति अपनाने की बात कही है. काफी दिनों से ऐसी खबरें थीं कि जापान नई रक्षा नीति ला सकता है, यही वजह है कि चीन के इस कदम को जापान की रक्षा नीति के जवाब में देखा जा रहा है.
जापान की ओर से अपनाई गई नई सुरक्षा नीति की चीन ने आलोचना की है. वहीं, प्रशांत क्षेत्र में चीन की ओर से नौसैनिक पोत भेजने को लेकर चीन का मुखपत्र और सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से भी यही कहा है कि चीन का यह कदम जापान की रक्षा नीति का जवाब है. इसके साथ ही चीन यह बताना चाहता है कि उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अपने देश की राष्ट्रीय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और हितों की रक्षा करने में सक्षम है.
जापान डिफेंस क्षेत्र में करेगा भारी-भरकम निवेश
जापान ने शुक्रवार को घोषणा की है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान सबसे बड़े सैन्य निर्माण की तैयारी कर रहा है. उत्तर कोरिया, चीन और रूस से चुनौतियों का सामना कर रहे जापान ने शुक्रवार को एक नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति अपनाई है. जापान सरकार ने घोषणा की है कि वह कुछ वर्षों में अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है.
जापान की सरकार ने इसके लिए भारी-भरकम रकम 320 अरब डॉलर का बजट रखा है. शांतिवाद को मानने वाला जापान में जिस योजना की कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, उसी जापान को यह बजट अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाले देश की श्रेणी में शामिल कर देगा.
जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने इस निर्णय को जापान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि हम विभिन्न स्तर पर रक्षा चुनौतियों को सामना कर रहे हैं. इस रक्षा बजट के माध्यम से जापान चीन के साथ क्षेत्रीय तनाव और रूस-यूक्रेन जंग से वैश्विक स्तर पर युद्ध की आशंका को देखते हुए खुद को तैयार करेगा और चीन पर हमला करने में सक्षम मिसाइलों को खरीदेगा.
किशिदा ने कहा कि सरकार इस बात से चिंतित है कि यूक्रेन से जंग में रूस का निर्णय चीन को ताइवान पर हमला करने के साथ-साथ नजदीकी जापानी द्वीपों को भी धमकी देने के लिए प्रोत्साहित करेगा. उन्होंने कहा कि चीन आगे चलकर ताइवान से जापान निर्यात होने वाली उच्च क्वालिटी के सेमीकंडक्टर के निर्यात को बाधित कर सकता है. इसके साथ ही जापान के प्रधानमंत्री ने इस बात की आशंका भी जताई है कि मध्य-पूर्वी देशों से जो तेल जापान खरीदता है उसे भी चीन समुद्री रास्ते में रोक सकता है.
जापानी आत्मरक्षा बल के पूर्व एडमिरल और 2008 में जापानी फ्लीट के कमांडर योजी कोदा ने कहा कि यह रक्षा बजट जापान की सुरक्षा में एक नया अध्याय जोड़ने का काम करेगी. उन्होंने कहा कि जापान की सेना अब विश्व स्तरीय और ताकतवर सेना होगी. सरकार ने घोषणा की है कि वह सैन्य उपकरणों से संबंधित स्पेयर पार्टस और गोला-बारूद का भंडारण करने के साथ-साथ सैन्य तक पहुंच आसान बनाने के लिए परिवहन क्षमता का भी विस्तार करेगी.
जापान की ओर से जारी स्ट्रेटजिक डॉक्यूमेंट (रणनीतिक दस्तावेज) में कहा गया है कि यूक्रेन में रूस का आक्रमण अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और रूस की ओर से किया गया सेना का बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय व्यस्था की नींव हिलाने वाली है. दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि चीन की रणनीतिक तैयारी जापान के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है. जापान ने रूस, चीन और उत्तर कोरिया को वैश्विक समुदाय के लिए खतरा बताया है.
चीन की भी पूरी तैयारी
चीन सरकार ने जहां जापान की नई सुरक्षा नीति की आलोचना की है. वहीं, चीनी नौसेनिक पोतों के एक बेड़े ने जापान के पास जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के रास्ते प्रशांत क्षेत्र में प्रवेश किया है. यह पोत ल्हासा और कैफेंग से होकर गुजरा जबकि एक टैंकर जहाज ओसुमी जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हुए गुरुवार को प्रशांत क्षेत्र में पहुंचा है. इसके अलावा एक सर्विलांस जहाज को भी चीन ने मियाको जलडमरूमध्य के रास्ते से पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तैनात किया है.
चीन अपने जहाज को नियमित रूप से जापानी द्वीपों के बीच जलडमरूमध्य के रास्ते युद्धपोत को भेजता रहा है, वहीं खुद ताइवान जलडमरूमध्य क्षेत्र में विदेशी नौसेना के जहाजों की आवागमन पर विरोध करता है. ये सभी क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के अंतर्गत आते हैं.
पिछले महीने के अंत में भी रूसी और चीनी रणनीतिक बॉम्बर्स (बमवर्षकों) ने आठ घंटे तक जापान सागर और चीन सागर के ऊपर से उड़ान भरी. यह प्रदर्शन दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रक्षा संबंध को दिखाने के लिए आयोजित किया गया था.
एक्शन मोड में रहने का निर्देश
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले ही महीने सेना को संबोधन करते हुए कहा था कि चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ती अस्थिरता और अनिश्चितता का सामना कर रही है. वहीं, सेना को एक्शन मोड में रहने का निर्देश देते हुए कहा था कि युद्ध की तैयारी के लिए सेना अपनी सारी ऊर्जा लगा दे.
इंडो-पैसिफिक पर चीन ने क्या कहा
इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) रीजन पर 7 दिसंबर फ्रांस में चीन के राजदूत लू शाये ने एक मीडिया संबोधन में कहा था कि जियो-पॉलिटिक्स में इंडो-पैसिफिक नाम की कोई अवधारणा नहीं है. इस अवधारणा को अमेरिका की ओर से जानबूझ कर भारत और अन्य सहयोगियों को शामिल करने के लिए बनाया गया है.