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इमिग्रेशन में कमी से कनाडा की आबादी में आई गिरावट! क्या फिर तेज़ होगा आप्रवासन?

विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा की जनसंख्या वृद्धि लंबे समय से इमिग्रेशन पर निर्भर रही है, लेकिन हाल के सालों में सरकार द्वारा तय किए गए कम इमिग्रेशन टारगेट्स का असर अब दिखने लगा है.

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कनाडा में इमिग्रेशन में आई कमी अब देश की जनसंख्या वृद्धि पर सीधा असर डाल रही है.
कनाडा में इमिग्रेशन में आई कमी अब देश की जनसंख्या वृद्धि पर सीधा असर डाल रही है.

कनाडा की जनसंख्या में लगातार तीसरी तिमाही गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश की इमिग्रेशन नीतियों और भविष्य की रणनीति पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. Statistics Canada के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में देश की आबादी 0.1 प्रतिशत घटकर लगभग 41.4 मिलियन रह गई, यानी करीब 55,025 लोगों की कमी दर्ज हुई.

विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह इमिग्रेशन टारगेट्स में की गई कटौती और जन्मदर का लगातार कम होना है. पिछले कुछ सालों से कनाडा की जनसंख्या वृद्धि मुख्य रूप से इमिग्रेशन पर निर्भर रही है, लेकिन अब सरकार द्वारा कम इमिग्रेशन नीतियां अपनाने के बाद यह संतुलन बिगड़ता दिख रहा है.

IRCC (Immigration, Refugees and Citizenship Canada) ने 2026 के लिए इमिग्रेशन की संख्या में कटौती की है. इसके तहत सरकार का लक्ष्य है कि 2027 के अंत तक “temporary population” को कुल आबादी के 5 प्रतिशत से नीचे लाया जाए. इसी नीति का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.

आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कनाडा में 83,149 नए स्थायी इमिग्रेंट्स आए, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 20.2 प्रतिशत कम है. वहीं, अस्थायी निवासियों (non-permanent residents) की संख्या में भी 117,879 की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

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McMaster University के प्रोफेसर Bruce Newbold का कहना है कि कनाडा में जनसंख्या गिरावट कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक लंबे समय से चल रहा ट्रेंड है. उनके अनुसार, बेबी बूम के बाद से जन्मदर लगातार घटती गई है और अब यह “replacement level” से भी नीचे पहुंच चुकी है. इमिग्रेशन लंबे समय तक इस गिरावट को संतुलित करता रहा, लेकिन अब उसमें कमी आने से जनसंख्या वृद्धि धीमी हो गई है.

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि फिलहाल यह गिरावट बहुत गंभीर नहीं है, लेकिन अगर यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहा तो इसका असर देश की आर्थिक वृद्धि और श्रम बाजार पर पड़ सकता है.

इमिग्रेशन वकील Chantal Desloges के अनुसार, सरकार की नई नीतियों के कारण वर्क परमिट, स्टडी परमिट और फैमिली क्लास इमिग्रेशन सभी क्षेत्रों में मंजूरी की संख्या कम हुई है. यह बदलाव मुख्य रूप से बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक दबाव के जवाब में किया गया है.

उन्होंने यह भी कहा कि अब कई लोग कनाडा की जगह ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूके जैसे देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे कनाडा की “attractiveness” पहले की तुलना में कम होती दिख रही है.

इसी बीच कई प्रवासी भी यह महसूस कर रहे हैं कि वर्क परमिट और स्टडी परमिट में देरी और सीमित अवसरों के कारण स्थिति कठिन हो रही है. इसी वजह से कुछ लोग अपने देश लौटने या दूसरे देशों में जाने का विकल्प चुन रहे हैं.

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अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कनाडा सरकार आने वाले समय में अपनी इमिग्रेशन नीतियों को फिर से तेज करेगी या यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सरकार दबाव कम करने के लिए सीमित नीति ही बनाए रखेगी.

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