भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले डेढ़ साल से रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) पर हमलों, सीमा विवाद, व्यापार प्रतिबंध, क्रिकेट जैसे खेलों में राजनीतिक हस्तक्षेप और हाल ही में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा पाकिस्तान के साथ निकटता बढ़ाने जैसे मुद्दों ने रिश्तों को ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा दिया है.
भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली सहायता में आधा कटौती की है, जबकि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं और वीजा सेवाएं निलंबित की हैं. इसी बीच तनावपूर्ण माहौल में बांग्लादेश ने भारत को अपने आगामी चुनावों के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक बनने का न्योता दिया है.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख डॉ. मोहम्मद युनुस के कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, 12 फरवरी को देश में होने वाले 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश ने भारत को अन्य देशों के साथ चुनाव के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक के रूप में आमंत्रित किया है. हालांकि, भारत ने अभी तक बांग्लादेश को पर्यवेक्षक के रूप में अपनी भागीदारी की पुष्टि नहीं की है.
330 देशों ने की पुष्टि
अंतरिम सरकार ने बताया कि अब तक ओआईसी (OIC) और यूरोपीय संघ समेत 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भागीदारी की पुष्टि की है. हालांकि, भारत, नेपाल और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अभी तक अपने प्रतिनिधियों के नाम साझा नहीं किए हैं. ये चुनाव 300 संसदीय सीटों और 'जुलाई नेशनल चार्टर' पर जनमत संग्रह के लिए एक साथ आयोजित किया जा रहा है.
अंतरिम सरकार के मुताबिक, इस बार पर्यवेक्षकों की संख्या 2024 के विवादित चुनावों की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है. कॉमनवेल्थ सचिवालय से 25, एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शन (ANFREL) से 28 और अमेरिका के आईआरआई (IRI) से 7 पर्यवेक्षक ढाका पहुंचेंगे.
मुख्य सलाहकार के कार्यालय द्वारा जारी की माने तो विदेश मंत्रालय और चुनाव आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वॉयस फॉर जस्टिस, डेमोक्रेसी इंटरनेशनल, एसएनएएस अफ्रीका, सार्क मानवाधिकार फाउंडेशन और पोलिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स जैसे संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 32 पर्यवेक्षक अपनी व्यक्तिगत क्षमता में चुनाव की निगरानी करेंगे.
'अभी और बढ़ेंगी पर्यवेक्षकों की संख्या'
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक दौरों के समन्वय की देखरेख कर रही वरिष्ठ सचिव और एसडीजी समन्वयक लामिया मुर्शीद ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि कई देशों ने पर्यवेक्षक मिशन भेजने के लिए आमंत्रित किए जाने के बावजूद अभी तक अपने प्रतिनिधियों के नामों की पुष्टि नहीं की है.'
उन्होंने बताया कि जिन देशों को अभी अपने प्रतिनिधियों की पुष्टि करनी है. उनमें भारत, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, कुवैत, मोरक्को, नाइजीरिया और रोमानिया शामिल हैं.
हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी
दूसरी ओर चुनावी सरगर्मी के बीच बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर हिंसा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार की खबरें आ रही हैं. मानवाधिकार संगठनों (NGO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में चुनावी हिंसा की घटनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
'50 से ज्यादा पार्टियां मैदान में'
बताया जा रहा है बांग्लादेश में होने वाले आगामी चुनाव में लगभग 2,000 उम्मीदवार और 50 से अधिक राजनीतिक दल मैदान में हैं, लेकिन सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है. भारत की ओर से अभी तक पुष्टि न होने के पीछे इन सुरक्षा कारणों और द्विपक्षीय तनाव को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है.
ये चुनाव बांग्लादेश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मुख्य सलाहकार डॉ. युनुस ने इसे 2026 की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया करार दिया है. हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने और हिंसा के माहौल ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.