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अमेरिका ने पकड़ा ईरान का एक और जहाज, इस बार तेल टैंकर पर बोला धावा- VIDEO

सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान से जुड़े एक तेल टैंकर को पकड़ लिया है. M/T Tifani पर कार्रवाई के बाद तनाव फिर बढ़ गया है और बातचीत पर भी असर पड़ सकता है. इससे पहले अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी कंटेनर शिप को पकड़ लिया था.

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ईरानी तेल टैंकर को अमेरिकी नौसेना ने पकड़ा. (Photo- ITG)
ईरानी तेल टैंकर को अमेरिकी नौसेना ने पकड़ा. (Photo- ITG)

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है. सीजफायर के दौरान ही अमेरिका ने ईरान से जुड़े एक और तेल टैंकर को पकड़ लिया है. M/T Tifani नाम के इस जहाज पर अमेरिकी सेना ने इंडियन ओशन में कार्रवाई की, जिससे हालात और गर्मा गए हैं.
अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक, यह ऑपरेशन बिना किसी झड़प के पूरा किया गया. बयान में कहा गया कि अमेरिकी बलों ने "राइट ऑफ विजिट" के तहत इस जहाज को रोका, उसकी तलाशी ली और अपने कब्जे में लिया.

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यह कार्रवाई INDOPACOM के इलाके में की गई. अमेरिका का कहना है कि यह जहाज ईरानी तेल की तस्करी में शामिल था और उस पर पहले से प्रतिबंध लगा हुआ था. पेंटागन ने साफ किया कि वह ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए दुनिया के किसी भी हिस्से में कार्रवाई करता रहेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टैंकर बंगाल की खाड़ी में भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच पकड़ा गया.

जहाज बोत्सवाना के झंडे के तहत चल रहा था और उसका आखिरी सिग्नल श्रीलंका और मलक्का स्ट्रेट के बीच मिला था. माना जा रहा है कि यह सिंगापुर की ओर जा रहा था. अब अमेरिकी सेना इस पर फैसला करेगी कि इस जहाज का क्या किया जाए. इसे अमेरिका ले जाया जाए या किसी और देश को सौंपा जाए.

इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि वे किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार हैं.

गौर करने वाली बात यह है कि सीजफायर के दौरान यह दूसरा जहाज है, जिस पर अमेरिका ने कार्रवाई की है. इससे पहले Touska नाम के एक ईरानी कंटेनर शिप को भी अमेरिकी सेना ने खाड़ी के पास रोका था. उस समय अमेरिका का कहना था कि जहाज ने उसके आदेशों को नहीं माना था. इन कार्रवाइयों से साफ है कि सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच भरोसा नहीं बन पा रहा है. ईरान ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर “पायरेसी” बताया है और जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी है.

इस घटना का असर बातचीत पर भी पड़ता दिख रहा है. हाल ही में ईरान ने कहा था कि वह अमेरिका के साथ होने वाली अगली बातचीत में अपने प्रतिनिधि नहीं भेजेगा. माना जा रहा है कि ऐसे कदमों से दोनों देशों के बीच दूरी और बढ़ सकती है. फिलहाल, हालात ऐसे हैं कि एक तरफ बातचीत की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ इस तरह की सैन्य कार्रवाई भी जारी है. यानी सीजफायर के बावजूद जमीन पर तनाव कम होने के बजाय बना हुआ है.

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