ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. उन्होंने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य के उस आदेश में राहत देने की मांग की है, जिसमें उन्हें विदेश जाने पर रोक लगाई गई थी. दरअसल, बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज मामले में हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी. हालांकि, अदालत ने यह शर्त भी लगाई थी कि वह कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकते.
अब अभिषेक बनर्जी ने उसी आदेश में संशोधन की मांग करते हुए अदालत को बताया है कि उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाना आवश्यक है. 22 मई को दिए गए आदेश में न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा था कि मामले की अगली सुनवाई या 31 जुलाई तक याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि विदेश यात्रा से पहले कोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा और जांच अधिकारी को 48 घंटे पहले इसकी जानकारी देनी होगी.
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यह मामला 15 मई को दर्ज हुई एक शिकायत से जुड़ा है. बागूइयाती निवासी एक व्यक्ति ने बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कई वीडियो क्लिप जमा किए थे. शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ बयानों में कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणियां की गईं. इनमें '4 मई के बाद डीजे बजेगा… देखते हैं दिल्ली का कौन बाबा बचाता है' जैसे कथित बयान शामिल थे. इन वीडियो क्लिप्स को देखने के बाद कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी.
बता दें कि अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद से कोलकाता लौटते समय अभिषेक बनर्जी एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे. इस दुर्घटना में उनकी आंख के नीचे गंभीर चोट लगी थी. शुरुआती इलाज देश के कई अस्पतालों में हुआ था, जिसके बाद वह आंखों की सर्जरी और विशेष उपचार के लिए विदेश भी गए थे.
'श्रद्धार्घ्य योजना' अभिषेक के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट
इस बीच अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. 'श्रद्धार्घ्य योजना' में कथित भ्रष्टाचार को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है. अभिजीत दास नाम के व्यक्ति ने दक्षिण 24 परगना जिले के बिष्णुपुर थाने में शिकायत दाखिल करते हुए योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है. शिकायत में कहा गया है कि इस योजना के तहत 76 हजार वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने 1,000 रुपये दिए जा रहे थे, लेकिन इसके लिए इस्तेमाल किए गए फंड के स्रोत को लेकर गंभीर सवाल हैं.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस योजना में करीब 91 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. साथ ही उन्होंने मांग की है कि यह जांच की जाए कि योजना का लाभ किन लोगों को दिया गया और लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया क्या थी. अभिजीत दास ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और फंडिंग के स्रोत का पता लगाने की मांग की है. फिलहाल पुलिस की ओर से मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.