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बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में कलह? प्रोटेस्ट से 44 विधायक गायब, पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. पार्टी के विरोध प्रदर्शन में आधे से ज्यादा विधायक गैरहाजिर रहे, जबकि कांचरापाड़ा और हलीशहर नगरपालिकाओं में बड़ी संख्या में पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया.

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तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी. (Photo: X/@AITCofficial)
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी. (Photo: X/@AITCofficial)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा. इसके संकेत उस समय साफ दिखाई दिए जब विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में विधायकों की मौजूदगी बेहद कम रही. इसके साथ ही, टीएमसी शासित दो नगरपालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी के अंदर बगावत की अटकलों को और तेज कर दिया है.

विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास आयोजित धरना प्रदर्शन में पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही शामिल हुए. टीएमसी विधायक राज्य की नई सरकार पर चुनाव बाद हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और फुटपाथ दुकानदारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. विधायकों की अनुपस्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब टीएमसी राज्य में अपनी जमीनी पकड़ दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

इससे पहले कालीघाट में 19 मई को हुई पार्टी बैठक में भी 15 के करीब विधायक नहीं पहुंचे थे. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में कई विधायकों ने पार्टी की रणनीति को लेकर चिंता जताई थी. उनका कहना था कि केवल बंद कमरे में बैठकें करने से जनता का भरोसा वापस नहीं जीता जा सकता. सूत्रों के मुताबिक कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने जहांगीर खान के चुनाव से हटने को लेकर नेतृत्व पर सवाल उठाए. 

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तीनों विधायक एक ही गाड़ी में बैठक में पहुंचे थे, जिसे राजनीतिक हलकों में खास संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. नेताओं ने पूछा कि मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव छोड़ने के बावजूद जहांगीर खान के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई. कुछ टिप्पणियां अप्रत्यक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाकर की गईं, क्योंकि फलता विधानसभा सीट उनके डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है.

कांचरापाड़ा के 24 में से 15 पार्षदों का इस्तीफा

इसी बीच, उत्तर 24 परगना जिले की कांचरापाड़ा और हलीशहर नगरपालिकाओं में टीएमसी को बड़ा झटका लगा. कांचरापाड़ा नगरपालिका में 24 में से 15 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया, जबकि हलीशहर नगरपालिका में 23 में से 16 पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पद छोड़ दिए. टीएमसी सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही नगरपालिका नेतृत्व के भीतर असंतोष बढ़ रहा था. स्थानीय नेताओं पर सक्रिय नेतृत्व न देने और नगर सेवाओं के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे थे. 

हलीशहर के  23 में से 16 पार्षदों का इस्तीफा

सूत्रों ने यह भी बताया कि बिजपुर से बीजेपी विधायक सुदीप्त दास ने हाल ही में नगरपालिका अधिकारियों के साथ बैठक की थी. कल्याणी में 17 मई को हुई टीएमसी पार्षदों की बैठक में इस्तीफे का फैसला लिया गया. हलीशहर नगरपालिका में 20 मई की दोपहर डिप्टी चेयरमैन की मौजूदगी में पार्षद राजू साहनी के नेतृत्व में 16 पार्षदों ने आपात बैठक की और इसके बाद सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया. इस्तीफा देने वालों में पांच महिला पार्षद भी शामिल हैं. हालांकि नगरपालिका चेयरमैन शुभंकर घोष ने इस्तीफा नहीं दिया और अपने पद पर बने हुए हैं.

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बीजेपी विधायक सुदीप्त दास ने इस्तीफा देने वाले 16 पार्षदों की सूची जारी की. उन्होंने कहा, 'मैं जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि नगरपालिका की सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी. आम नागरिकों के लिए सभी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी.' इन इस्तीफों के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में कुछ पार्षद बीजेपी का दामन थाम सकते हैं? हालांकि टीएमसी नेतृत्व ने अब तक पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है.

(दीपक देबनाथ के इनपुट के साथ)

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