बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ पर लेखिका तसलीमा नसरीन ने तारिक रहमान सरकार की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि सरकार कट्टरपंथी समूहों को बढ़ावा दे रही है. तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में कट्टरपंथ के बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के समर्थन की वजह से बांग्लादेश में जिहादी कट्टरपंथी समूह बढ़े हैं. अगर देश को स्वस्थ और सभ्य बनाना है, तो इन अतिवादी कट्टरपंथियों का विरोध करना ही होगा.
तसलीमा ने कहा कि इस कट्टरपंथ को खत्म करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए तसलीमा नसरीन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बांग्लादेश और भारत के बीच दोस्ताना रिश्ते बने रहेंगे.
बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा की संभावना और दोनों देशों के रिश्तों पर इसके असर के बारे में पूछे जाने पर नसरीन ने कहा कि स्थिति अभी अनिश्चित है.
उन्होंने कहा, "जिस तरह बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी को बढ़ावा दिया जा रहा है और कट्टरपंथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से बचा जा रहा है, उससे यह साफ नहीं है कि रिश्ते किस दिशा में जाएंगे."
हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश सरकार चरमपंथी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करेगी और दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते "सकारात्मक और दोस्ताना" बने रहेंगे.
लेखिका ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार इन मुश्किल हालात के बावजूद कार्रवाई करेगी और भविष्य में भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सकारात्मक और दोस्ताना रहेंगे."
जुलाई के बाद कोलकाता की अपनी दूसरी यात्रा पर आईं नसरीन ने कहा कि वह शहर में वापस आकर खुश हैं, लेकिन इस साल दुर्गा पूजा के दौरान यहां नहीं रह पाएंगी.
उन्होंने कहा, "मैं इस बार पूजा में शामिल नहीं हो पाऊंगी, लेकिन अगले साल ज़रूर आऊंगी. मुझे यहां की पूजा बहुत पसंद है. यह किसी आर्ट एग्ज़िबिशन जैसा लगता है."
डॉक्टर से लेखिका बनीं नसरीन गुरुवार को एक कार्यक्रम में शामिल होंगी, जहां वह अपनी कविताएं सुनाएंगी और मशहूर कलाकार उनकी कविताओं पर आधारित गाने गाएंगे.
"शिकोल भांगार गोल्पो" (बेड़ियां तोड़ने की कहानियां) नाम का यह कार्यक्रम नारीवादी कविताओं और उन गानों पर केंद्रित होगा जो महिलाओं के प्यार, इच्छाओं, दुख, प्रतिरोध और अपनी शर्तों पर जीने के उनके अधिकार से जुड़े हैं.
11 अक्टूबर को तसलीमा साल्ट लेक में "साहित्य में शालीनता और अश्लीलता की सीमाएं" विषय पर बोलेंगी. इस कार्यक्रम में बच्चों के लिए उनकी अंग्रेज़ी भाषा की किताब "जैस्मिन" भी लॉन्च की जाएगी.
रिपोर्ट के अनुसार अगर समय मिला तो तसलीमा नसरीन के कोलाघाट जाकर हिल्सा मछली का स्वाद लेने और पश्चिम मेदिनीपुर ज़िले के बिरसिंघा में 19वीं सदी के विद्वान ईश्वर चंद्र विद्यासागर के जन्मस्थान या हावड़ा ज़िले में मशहूर लेखक शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के घर जाने की उम्मीद है.
नसरीन ने बुधवार को यह भी कहा कि वे 10 अक्टूबर को ईडन गार्डन में महालया कार्यक्रम में शामिल होंगी.
उन्होंने कहा, "मैं महालया के समय यहीं रहूंगी और अगर संभव हुआ, तो ईडन गार्डन में महालया कार्यक्रम में शामिल होऊंगी."
तसलीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद 31 जुलाई को कोलकाता आई थीं.