पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC ने शुक्रवार को कहा कि उसके ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी से एक 'चिंताजनक ट्रेंड' शुरू हुआ है. यह फर्म का इस पूरे घटनाक्रम पर पहला बयान है, जिसने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, जहां कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. I-PAC ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करती रहेगी और अपना काम जारी रखेगी.
फर्म ने अपने बयान में कहा कि गुरुवार का दिन I-PAC जैसे एक प्रोफेशनल ऑर्गेनाइजेशन के लिए मुश्किल और दुर्भाग्यपूर्ण रहा. इसके बावजूद हमने कानून का सम्मान करते हुए पूरी तरह सहयोग किया है और आगे भी करेंगे. I-PAC ने कहा कि वह हमेशा पेशेवर ईमानदारी के उच्च मानकों पर काम करती आई है और जो कुछ हुआ, उसके बाद भी उसका काम प्रभावित नहीं होगा.
'हम चुनाव नहीं लड़ते सिर्फ सलाह देते हैं'
I-PAC ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने बीते वर्षों में अलग-अलग विचारधाराओं और राज्यों में कई राजनीतिक दलों के साथ पेशेवर सलाहकार के तौर पर काम किया है, जिनमें बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, टीएमसी, जेडीयू और शिवसेना शामिल हैं. फर्म ने कहा कि वह चुनाव नहीं लड़ती और न ही किसी राजनीतिक पद पर है, बल्कि उसका काम सिर्फ पारदर्शी और पेशेवर राजनीतिक सलाह देना है.
गुरुवार को ED ने मारी थी रेड
गौरतलब है कि गुरुवार को ईडी की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक I-PAC निदेशक प्रतीक जैन के मध्य कोलकाता स्थित आवास और बाद में साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय पहुंच गई थीं. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ईडी विधानसभा चुनाव से जुड़े टीएमसी के संवेदनशील डेटा जब्त करने की कोशिश कर रही है.
अदालत में पहुंचा मामला
वहीं ईडी ने बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि टीएमसी प्रमुख की ओर से राज्य पुलिस की मदद से जांच से जुड़े अहम दस्तावेज एजेंसी की हिरासत से 'ले लिए गए'. दूसरी ओर, टीएमसी ने भी हाई कोर्ट का रुख करते हुए ईडी पर मनमानी और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है और जब्त किए गए दस्तावेजों के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की है.