राजनीति में इत्तेफाक होते हैं? अगर हां तो आज जो बंगाल में हो रहा है उसे राजनीतिक इत्तेफाक ही कहा जाएगा. पर इस इत्तेफाक की शुरुआत पश्चिम बंगाल में 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हुई. दिल्ली में बंगाल के बंग भवन में सीएम शुभेंदु अधिकारी और ऋतब्रत बनर्जी की 22 मई को इत्तेफाकन मुलाकात हुई. और इसी मुलाकात का नतीजा ये है कि आज ऋतब्रत बनर्जी 60 टीएमसी विधायकों के साथ बागी हो गए हैं. वो ममता बनर्जी को अपना नेता जरूर मान रहे हैं लेकिन खुद विपक्षी नेता की कुर्सी पर बैठ रहे हैं. उन्होंने स्पीकर को विधायकों के हस्ताक्षर का पत्र भी सौंपा है और अब स्पीकर ने उन्हें विधानसभा में विपक्षी दल नेता के कमरे की चाभी दे दी है.
कहानी इत्तेफाक वाली मुलाकात की
4 मई को पश्चिम बंगाल में बीजेपी की लहर के बाद टीएमसी में रातोरात दौड़-भाग शुरू हो गई. भले ही ममता बनर्जी ने खुलकर हार नहीं स्वीकारा पर उन्होंने उसके बाद जितनी बैठकें बुलाईं उनमें धीरे-धीरे पार्टी पर से उनकी पकड़ कमजोर पड़ती गई. एक बैठक से दूसरे बैठक में विधायक, सांसद और पार्षदों की उपस्थिति की संख्या कम से कम होती गई.
एक तरफ टीएमसी के नेता, कार्यकर्ता और खुद अभिषेक बनर्जी ग्राउंड पर चोर-चोर नारे, मारपीट और लोगों के गुस्से का शिकार हो रहे हैं तो दूसरी तरफ एक-एक कर विधायक और सांसद पार्टी की बैठकों से दूरी बना रहे हैं.
इसी बीच, शपथ ग्रहण के बाद बतौर सीएम शुभेंदु अधिकारी ने 22 मई को दिल्ली का पहला दौरा किया. दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले वो बंग भवन गए. दिल्ली में पश्चिम बंगाल सरकार का भवन है, जहां अक्सर विधायक, अफसर रुकते हैं. और वो इत्तेफाक यहीं होता है जिसका असर आज बंगाल की राजनीति में दिख रहा है. यहां बंग भवन के गलियारे में शुभेंदु की मुलाकात टीएमसी से विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी के साथ होती है.

बंग भवन में सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात का पूरा विवरण खुद ऋतब्रत बनर्जी ने ही दिया था. उलुबेरिया पूर्व के विधायक ने कहा- मैं जब वहां था तो अचानक देखता हूं आवाज आती है- क्या विधायक साहब, बंग भवन में रुके हैं? जब मैंने देखा तो पाया कि वहां राज्य के मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने मुझे नमस्कार किया, मैंने भी उन्हें इसका उत्तर दिया. इसके बाद मैंने कहा कि नहीं दादा, मैं अपना बंगला खाली करने आया हूं, जो संसद की बाकी प्रक्रिया है पूरी करने आया हूं.फिर सीएम ने कहा कि मैं प्रशासनिक बैठकों में सभी विरोधी विधायकों को भी बुला रहा हूं, आप भी बैठक में आइएगा. फिर मैंने भी कहा कि सूचना मिलने पर जरूर आउंगा. हमारी 40 सेकंड की बातचीत हुई.
इसके बाद लोग कह रहे हैं कि मैं दिल्ली सीएम से मुलाकात करने आया हूं. पर ऐसा नहीं है. वो सीएम के तौर पर सदन के नेता हैं, वो नमस्कार करते हैं तो मैं मुंह फेर कर नहीं जा सकता.
दिल्ली में उस मुलाकात के बाद ही उनके बीजेपी के करीब आने की अफवाहों को हवा मिल गई थी. पर उन्होंने इसे तुरंत इनकार कर दिया था. कुछ दिन के भीतर ही आज वो 60 विधायकों के साथ अलग होकर बंगाल में लीडर ऑफ अपोजिशन (एलओपी) बन रहे हैं.
और इससे ये भी साबित होता है कि राजनीति में ऐसे 'इत्तेफाक' कभी भी बिना रणनीति के नहीं होते.