Uttar Pradesh News: रामपुर से लोकसभा चुनाव 2019 जीतने के तुरंत बाद सपा सांसद आजम खान के खिलाफ पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी. रामपुर में नए पुलिस कप्तान के रूप में 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' अजय पाल शर्मा की तैनाती हुई, जिसके बाद प्रशासनिक घटनाक्रम तेजी से बदले. शर्मा वही पुलिस अधिकारी हैं जिनकी इस वक्त पश्चिम बंगाल चुनाव में चर्चा है. खुद सपा मुखिया अखिलेश यादव उन पर ऊंगली उठा चुके हैं.
जुलाई 2019 में प्रशासन ने आजम खान का नाम आधिकारिक तौर पर एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज किया. उन पर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की जमीन कब्जाने और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के गंभीर आरोप लगे.
साल के अंत तक आजम और उनके परिवार पर मुकदमों की संख्या 80 के पार पहुंच गई, जिसने उनके निर्विवाद सियासी दबदबे को कानूनी लड़ाइयों में उलझा दिया. बाद में हालात ऐसे हो गए कि उन्हें जेल जाना पड़ा. बेटे की विधायक चली गई और वो भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया.
भू-माफिया का ठप्पा और मुकदमों की बाढ़
रामपुर प्रशासन ने पहली बार इतने बड़े कद के नेता को 'भू-माफिया की श्रेणी में डाला. आरोप था कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया. इसके बाद आजम खान, उनकी पत्नी ताजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्लाह आजम पर 65 से ज्यादा नए मुकदमे दर्ज हुए. इन मामलों में डकैती, धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे. प्रशासन की इस सख्ती ने रामपुर की राजनीति में हलचल मचा दी.
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जौहर यूनिवर्सिटी विवाद और बुलडोजर एक्शन
आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट, जौहर यूनिवर्सिटी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे. कई किसानों ने शिकायत की कि उनकी जमीन जबरन यूनिवर्सिटी में शामिल की गई. अगस्त 2019 में प्रशासन ने एक रिजॉर्ट की दीवार पर बुलडोजर चलवा दिया, क्योंकि वह सिंचाई विभाग की जमीन पर बनी थी. इसके अलावा...
★ कोर्ट के समन आजम खान के घर पर चस्पा किए गए.
★ Y-श्रेणी सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर पुलिस ने नोटिस भेजा.
★ यूनिवर्सिटी निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू हुई.
'सिंघम' एसपी और बदलता रामपुर
इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में एसपी अजय पाल शर्मा रहे. अपनी सख्त छवि और मीडिया में बेबाक बयानों के कारण उन्हें 'सिंघम' कहा गया. उनकी तैनाती को आजम खान के प्रभाव क्षेत्र में सीधी चुनौती माना गया. अजय पाल शर्मा ने पुराने मामलों की समीक्षा की और शिकायतों पर त्वरित एक्शन लिया. इसका असर यह हुआ कि रामपुर में दशकों से चला आ रहा आजम का एकछत्र राज कमजोर पड़ने लगा और परिवार कानूनी पेचीदगियों में घिर गया.