अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के एक IPS अधिकारी हैं. उन्हें मुख्य रूप से उनके 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' और 'सिंघम' वाले अंदाज के लिए जाना जाता है.
वे पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं. IPS बनने से पहले वह एक डेंटिस्ट (दांतों के डॉक्टर) थे. उन्होंने नोएडा, शामली, रामपुर और जौनपुर में तैनाती के दौरान कई अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर किए. अप्रैल 2026 से वे प्रयागराज में एडिशनल पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात हैं.
चुनाव आयोग ने उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में नियुक्त किया है, जहां टीएमसी नेताओं को चेतावनी देने के बाद वह फिर सुर्खियों में आए.
अजय पाल की दबंगई का वीडियो viral.
पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान पर मतदाताओं को धमकाने के आरोप लगे हैं. चुनाव ड्यूटी पर तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायत दोबारा मिली तो सख्त कार्रवाई होगी. जांच के दौरान जहांगीर के घर पर 14 पुलिसकर्मी तैनात मिले.
पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच आईपीएस अजय पाल शर्मा और तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान से जुड़ा विवाद गरमा गया है. वायरल वीडियो में अजय पाल शर्मा कथित तौर पर चेतावनी देते दिखे. इसके बाद अखिलेश यादव ने उन्हें भाजपा का एजेंट बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उनके पुराने रिकॉर्ड और गंभीर आरोपों का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग की नियुक्ति पर सवाल उठाए.
पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले यूपी के चर्चित आईपीएस अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना का पुलिस पर्यवेक्षक बनाया गया है. तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस संवेदनशील इलाके में उनकी तैनाती ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. अजय पाल शर्मा ने सक्रियता दिखाते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और जहांगीर खान को चेतावनी दी. उनकी सख्त छवि और कार्रवाई चर्चा में है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं.
उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं. लेकिन इस बार चर्चा में आने की वजह उत्तर प्रदेश में किसी एनकाउंटर को लेकर नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में उनकी एंट्री को लेकर हो रही है. चुनाव आयोग ने उन्हें पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर बंगाल भेजा है, जिसके बाद वहां की सियासत में भूचाल आ गया है.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया. निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विरोध जताया. आयोग को मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र जमा कराने की शिकायत मिली थी. तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.' वहीं तृणमूल नेताओं ने शर्मा पर अधिकार सीमा लांघने का आरोप लगाया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
साल 2019 आजम खान के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. लोकसभा चुनाव जीतने के तुरंत बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ चौतरफा कार्रवाई शुरू की. भू-माफिया घोषित होने से लेकर दर्जनों मुकदमों तक, 'सिंघम' एसपी अजय पाल शर्मा की तैनाती ने रामपुर की सियासत की दिशा बदल दी.
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस पर्यवेक्षक ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और बाद में उनके घर जाकर परिवार को डराने की कोशिश की. जहांगीर खान ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि भाजपा की मदद के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए जा रहे हैं. इस बयान से क्षेत्र का चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.