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योगी सरकार में चमकी 'पीतल नगरी', सुरक्षा और ODOP के दम पर मुरादाबाद के हैंडीक्राफ्ट की दुनिया में धूम!

मुरादाबाद का पीतल एवं मेटल हैंडीक्राफ्ट उद्योग खूब तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका सालाना टर्नओवर करीब 7,000 करोड़ रुपये का हो गया है और हर साल बढ़ रहा है. कारोबारियों ने इसके पीछे की वजह बेहतर कानून-व्यवस्था, उद्योग के अनुकूल माहौल भी बताया है.

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योगी सरकार में 'पीतल नगरी' मुरादाबाद के कारोबार में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई.
योगी सरकार में 'पीतल नगरी' मुरादाबाद के कारोबार में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज 'उत्तम प्रदेश' से 'आत्मनिर्भर प्रदेश' बनने की दिशा में बढ़ रहा है. प्रदेश की सशक्त अर्थव्यवस्था की नींव रखने के लिए योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं एक गेम-चेंजर बन रही है. मुरादाबाद का पारंपरिक हैंडीक्रॉफ्ट एक नई बुलंदी हासिल कर रहा है.

मुरादाबाद की पहचान उसकी मिट्टी और यहा के कारीगरों के हाथों में बसे हुनर से है. यहां का पीतल उद्योग सिर्फ एक व्यापार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक परंपरा है. सपा सरकार में मुरादाबाद का कारोबार दम तोड़ रहा था, लेकिन योगी सरकार के विजन से नया जीवन ही नहीं मिला, बल्कि प्रदेश के युवाओं को'जॉब क्रिएटर' बना दिया है.

योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में पीतल नगरी मुरादाबाद का ब्रास उद्योग नई रफ्तार पकड़ता दिखाई दे रहा है. उद्योग से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कानून-व्यवस्था में सुधार, बेहतर कारोबारी माहौल और सरकारी प्रोत्साहन के कारण उत्पादन, निर्यात और रोजगार में सकारात्मक बदलाव आया है.

योगी सरकार में पीतल कारोबार को नई उड़ान
उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद देश और दुन‍िया में अपने हैंडीक्रॉफ्ट के लिए मशहूर है. यहां के पीतल उद्योग का इत‍िहास 100 साल से भी ज्यादा का है. मुरादाबाद की हर गली में आपको इस उद्योग से जुड़े लोग मिल जाएंगे. मुरादाबाद में बर्तन और ब्रास के डेकोरेटिव आइट्मस की चमक पूरी दुनिया में है. मुरादाबाद के पीतल कारोबारी राहुल अग्रवाल का कहना है कि योगी सरकार बनने के बाद कारोबार में काफी तेजी आई है. 

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पीतल कारोबारी राहुल अग्रवाल का कहना है कि पहले सुरक्षा को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन अब कारोबारी खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं. रात में भी बिना किसी डर के काम किया जा सकता है और व्यापारी एक जगह से दूसरी जगह आसानी से आ-जा सकते हैं। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था मजबूत होने का सीधा फायदा उद्योग और व्यापार को मिला है.

मुरादाबाद के हैंडीकॉफ्ट की दुनिया में धूम
वहीं,  तानिया भाटिया, जो सोर्सिंग प्रोफेशनल और बॉयर रिक्रूटर है. उन्होंने बताया योगी सरकार के बाद उत्तर प्रदेश में विदेशी खरीदार (बायर्स) पहले की तुलना में अधिक सहजता से आने लगे हैं और उनका काम और आसान हो गया है पहले की सरकार में बार आने से कतराता था लेकिन अब उन्हें सुरक्षा को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती. इससे मुरादाबाद के पीतल उद्योग के साथ-साथ अन्य कारोबारों को भी फायदा हुआ है और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिली है.

मुरादाबाद में बनने वाले ब्रासवेयर, होम डेकोर आइटम, धार्मिक मूर्तियां, कैंडल स्टैंड, लैंप, ट्रे, वास और अन्य सजावटी उत्पाद अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व समेत दुनिया के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले वर्षों में निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे जिले की पहचान वैश्विक बाजार में और मजबूत हुई है. अमेरिका से लेकर मिडिल ईस्ट तक मुरादाबाद  के  पीतल के उत्पादों (जैसे फूलदान, मूर्तियां और सजावटी सामान) का निर्यात हो रहा है. 

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योगी सरकार की ODOP योजना से नहीं बुलंदी
मुरादाबाद के पीतल कारीगर मोहम्मद मतलूफ  ने भी बताया कि 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत पीतल उद्योग को नई ऊर्जा मिली है. ODOP के तहत मिले प्रशिक्षण और टूलकिट से उनके काम में निखार आया है.  'एक जिला, एक उत्पाद' कार्यक्रम के तहत मुरादाबाद में कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की गई है, जहाँ अत्याधुनिक पीवीडी (PVD) कोटिंग मशीनें लगाई गई हैं, इससे स्थानीय कारीगरों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिनिशिंग और रियायती दरें प्राप्त हो रही हैं.

योगी सरकार की योजना के चलते स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से अब बड़ी संख्या में लोगों को मुरादाबाद शहर में काम मिल रहा है. अब बाहर पलायन की आवश्यकता पहले की तुलना में कम हुई है,इस उद्योग से न केवल हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि यह जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार भी है.

हैंडीक्राफ्ट से पांच लाख लोगों को रोजगार
मुरादाबाद में एक्सपोर्टर कहते हैं, अब आपको यहां शहर में हर तरह का काम ब्रास का मिलेगा. साथ ही वही काम स्टील में भी आप देख सकते हैं. सबसे पहले ब्रास या स्टील के रॉ मैटेरियल की कटिंग की जाती है. इसके बाद उसको मशीन के हिसाब से डिज़ाइन को भी उसके हिसाब बनाया जाता है. नए जमाने के साथ चलना है तो पुराने मिजाज को छोड़ना पड़ेगा ही इसलिए इस शहर ने पीतल कारोबार की अपनी बुलंदियों के दौर को भुलाते हुए अब नए हैंडीक्राफ्ट आइटम्स पर फोकस करना शुरू कर दिया है. यहां बनाए जाने वाले आकर्षक पीतल के बर्तन अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और मध्य पूर्व एशिया के देशों को निर्यात किए जाते हैं.

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हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष एवं पीतल कारोबारी नीरज खन्ना के अनुसार, मुरादाबाद में करीब 600 पंजीकृत एक्सपोर्ट यूनिट्स, 3,000 3,500 पंजीकृत मेटल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और पूरे मेटल हैंडीक्राफ्ट इकोसिस्टम से जुड़ी 30,000 40,000 यूनिट्स कार्यरत हैं इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है.

मुरादाबाद में सात हजार करोड़ का कारोबार
उद्योग जगत के अनुसार, मुरादाबाद का पीतल एवं मेटल हैंडीक्राफ्ट उद्योग आज लगभग 7,000 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार कर रहा है. कारोबारियों का कहना है कि बेहतर कानून-व्यवस्था, उद्योग के अनुकूल माहौल और बढ़ते निर्यात की वजह से मुरादाबाद का पीतल उद्योग लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है.

उन्होंने बताया कि सरकार की एमएसएमई और ओडीओपीस योजना बहुत ही लाभदायक है और इससे जुड़ने के लिए सरकार जागरूक करती आ रही है और साथ ही साथ वह हेल्पलाइन भी चला रहे है helpline@epch.com के जरिये लोग सरकार की इन योजना से जुड़ रहे है और सीख रहे हैं.

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