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ISIS मॉड्यूल से जुड़ा BDS का छात्र, पाकिस्तान और विदेश में बैठे हैंडलरों से जुड़े लिंक

उत्तर प्रदेश एटीएस ने सहारनपुर के बीडीएस सेकेंड ईयर के छात्र हारिश अली को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह ISIS मॉड्यूल से जुड़कर सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड एप्स के जरिए लोगों को जोड़ रहा था. वह शरिया कानून और खिलाफत व्यवस्था स्थापित करने के लिए आतंकी विचारधारा का प्रचार कर रहा था.

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बीडीएस सेकेंड ईयर का छात्र हारिश अली अरेस्ट (Photo: Santosh sharma/ITG)
बीडीएस सेकेंड ईयर का छात्र हारिश अली अरेस्ट (Photo: Santosh sharma/ITG)

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिज्म स्क्वाड यानी यूपी एटीएस ने सहारनपुर के रहने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़कर आतंकी साजिश रचने का आरोप है. गिरफ्तार युवक की पहचान हारिश अली के रूप में हुई है, जो सहारनपुर के मानक मऊ मोहल्ले का निवासी है. एटीएस की टीम ने उसे मुरादाबाद से गिरफ्तार किया है.

एटीएस के अनुसार हारिश अली रियासत अली का बेटा है और बीडीएस सेकेंड ईयर का छात्र है. जांच एजेंसियों को इनपुट मिला था कि उत्तर प्रदेश सहित भारत के अलग अलग राज्यों में कुछ लोग ISIS के आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हुए हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं. इन लोगों का मकसद अधिक से अधिक युवाओं को जोड़कर भारत में ISIS नेटवर्क को मजबूत करना था.

BDS छात्र हारिश अली को मुरादाबाद से पकड़ा

जांच में सामने आया कि हारिश अली इंस्टाग्राम और कई एन्क्रिप्टेड एप्स जैसे सेशन और डिसकॉर्ड पर सक्रिय था. इन प्लेटफॉर्म पर वह ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा था. इन ग्रुप्स के जरिए वह ISIS की आतंकी जिहादी विचारधारा और शरिया आधारित खिलाफत व्यवस्था को स्थापित करने से जुड़ी सामग्री साझा करता था. 

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एटीएस के मुताबिक हारिश अली सोशल मीडिया पर छद्म नामों का इस्तेमाल करता था और अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन का भी प्रयोग करता था. वह अलग अलग ग्रुप्स बनाकर समान विचारधारा वाले लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा था और उन्हें ISIS से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहा था.

वीपीएन और छुपे नाम से बना रखे थे कई ऑनलाइन ग्रुप

इन ग्रुप्स में ISIS से जुड़ी प्रचार सामग्री, पत्रिकाएं, वीडियो, ऑडियो और तस्वीरें साझा की जाती थीं. इनमें ISIS के मारे गए आतंकियों की तस्वीरें और वीडियो भी शामिल थे, जिन्हें महिमामंडित करते हुए पोस्ट किया जाता था. इसके अलावा ISIS के कुख्यात आतंकी विचारकों के भाषण और संदेश भी इन ग्रुप्स में साझा किए जाते थे.

एटीएस की जांच में यह भी सामने आया कि हारिश अली ने अल इत्तिहाद मीडिया फाउंडेशन. नाम से एक अलग ग्रुप बनाया था. इस ग्रुप के जरिए वह ISIS के प्रचार प्रसार की सामग्री साझा करता था और लोगों को संगठन से जुड़ने के लिए प्रेरित करता था.

हारिश अली ISIS के मीडिया और न्यूज चैनल अल-नाबा और उसकी प्रचार मैगजीन दबिक का भी अनुसरण करता था. इन प्लेटफॉर्म से मिलने वाली सामग्री को वह अपने ग्रुप्स में साझा करता था और संगठन की विचारधारा का प्रचार करता था. जांच एजेंसियों का कहना है कि हारिश का नेटवर्क भारत के अलावा पाकिस्तान और अन्य देशों में मौजूद ISIS हैंडलरों से भी जुड़ा हुआ था. वह इन लोगों के संपर्क में रहकर संगठन की गतिविधियों से जुड़े निर्देश प्राप्त करता था.

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पाकिस्तान और विदेश में बैठे ISIS हैंडलरों से जुड़े होने के संकेत

एटीएस के अनुसार हारिश लोकतांत्रिक व्यवस्था को नहीं मानता था और भारत में चुनी हुई सरकार को गिराकर शरिया कानून के तहत खिलाफत व्यवस्था स्थापित करना चाहता था. इसके लिए वह अपने ग्रुप्स में लोगों को जंग-ए-जिहाद और फिदायीन हमले करने के लिए भी उकसाता था.

एटीएस को आशंका है कि वह भारत में ISIS के आतंकी मंसूबों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा था. फिलहाल एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है.
 

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