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7 साल पुराने केस में सरेंडर के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को मिली जमानत, कहा- केस अधर्मियों की साजिश

करीब 7 साल पुराने मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी कोर्ट में सरेंडर कर दिया था जिसके बाद उन्हें तुरंत जमानत भी मिल गई. जमानत मिलने के बाद 2015 के केस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अधर्मियों की साजिश करार दिया है.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली राहत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली राहत

साल 2015 के एक पुराने मामले में आत्मसमर्पण करने के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे अधर्मियों की साजिश करार दिया है. आत्मसमर्पण के बाद वाराणसी के जिला जज की अदालत में अविमुक्तेश्वरानंद को घंटों ज्यूडिशियल कस्टडी में रहना पड़ा. हालांकि बाद में उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई.

20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फौरी राहत दे दी, हालांकि नियमित बेल पर सुनवाई करने के बाद ही आगे का फैसला कोर्ट द्वारा लिया जाएगा.

दरअसल यह मामला 7 साल पुराना हैं. 2015 के प्रतिकार यात्रा में अविमुक्तेश्वरानंद सहित कुल 25 लोगों पर बलवा, आगजनी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हत्या की कोशिश करने जैसे संगीन धाराओं में दशाश्वमेध थाने में केस दर्ज किया गया था. इस पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि यह सब कुछ अधर्मियों की साजिश है.

कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, '2015 में दाखिल किया गया यह मुकदमा पूरी तरह से झूठा था, सरकार के विरोध में एक रैली प्रतिकार यात्रा के नाम से निकाल रहे थे तो सरकार ने झूठा मुकदमा करवा दिया. मुकदमा लंबे समय तक चला जिस दौरान दूसरे काम में व्यस्त होने के कारण इस पर ध्यान नहीं दे पाया.'

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उन्होंने कहा, 'कार्रवाई होती गई और हम लोगों को जानकारी नहीं दी गई, जब ज्योतिष पीठ पर उनका बतौर शंकराचार्य अभिषेक हुआ तब अखबारों में खबर छपा कि हम फरार हैं जिसके बाद काशी आकर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया.'

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'बड़े पद पर होने के बावजूद वह भारत के नागरिक हैं और कानून का सम्मान करते हैं. अब न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे की सुनवाई होगी. हम कहीं भागे नहीं थे. पुलिस पिछले 8 सालों से हमारे साथ ही रहती है.' उन्होंने कहा, 'हम कभी भागे नहीं और यह अदालती शब्द है कि हम फरार हैं.' 

अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म में नेतृत्व उभरने लगता है तो अधर्मी चाहते हैं कि सनातनियों का कोई धार्मिक नेता ना हो, चूंकि मैं धार्मिक नेतृत्व कर रहा था इसलिए स्वाभाविक है मेरे ऊपर प्रहार होना, लेकिन हम उसके लिए तैयार हैं. 

वहीं उनके वकील रमेश उपाध्याय ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जमानत पर जिला जज की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील की तरफ से पत्रावलियों को पढ़ने का समय मांगा गया था जिस पर नियमित जमानत के लिए शुक्रवार की तारीख तय हुई है. तब तक के लिए उन्हें 20 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मुक्त कर दिया है.

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