देश में ट्रेनों की लेट-लतीफी से हर कोई परेशान होता है. लेकिन इस लेट-लतीफी से तंग आकर एक छात्रा यात्री ने रेलवे को सबक सिखाने की ठान ली. उसने कोर्ट के माध्यम से मुकदमा ठोक दिया और भारी भरकम जुर्माने की मांग कर दी. आखिर में छात्रा की जीत हुई.
आइये जानते हैं पूरा मामला...
आपको बता दें कि पूरा मामला यूपी के बस्ती जिले का है जहां ट्रेन लेट होने के कारण छात्रा का पेपर छूट गया था. उसका पूरा साल बर्बाद हो गया था. आहत छात्रा ने रेलवे को सबक सिखाने के लिए अपने वकील के माध्यम से जुर्माना ठोक दिया. कई सालों तक चले इस मुकदमे में उपभोक्ता फोरम न्यायालय ने अब छात्रा के आरोपों को सही पाया और रेलवे पर तगड़ा जुर्माना लगा दिया.
दरअसल, कोतवाली थाना क्षेत्र के पिकौरा बक्स मोहल्ले की रहने वाली छात्रा समृद्धि BSc बायोटेक की तैयारी कर रही थी. उसका परीक्षा केंद्र लखनऊ के जयनारायण पीजी कॉलेज अलॉट हुआ. परीक्षा देने के लिए छात्रा ने बस्ती से इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट लिया. लखनऊ पहुंचने का समय 11 बजे निर्धारित था लेकिन लेट-लतीफी की चलते ट्रेन निर्धारित समय से ढाई घंटे देर से पहुंची, जबकि छात्रा को परीक्षा केंद्र पर 12:30 बजे ही पहुंचना था. ऐसे में उसका पेपर छूट गया.
इससे आहत छात्रा ने मामले को उपभोक्ता आयोग में उठाया तो रेलवे को इसका खामियाजा भुगतना पड़ गया. जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष/न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने रेलवे पर जुर्माना लगाते हुए छात्रा को 9 लाख 10 हजार हर्जाना देने का आदेश दिया दे दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि हर्जाना राशि देने में भी रेलवे विभाग देरी करता है तो उसे भुगतान राशि का 12 प्रतिशत ब्याज के तौर पर अलग से देना होगा.
इस पूरे मामले में समृद्धि के वकील प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि वह 7 मई 2018 को BSc बायोटेक की परीक्षा देने लखनऊ गई थी. लेकिन ट्रेन की लेट-लतीफी के चलते समृद्धि परीक्षा देने से वंचित हो गई और उसका पूरा साल बर्बाद हो गया. जिसपर उनके द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग में एक वाद दायर किया था. केस में रेलवे मंत्रालय, महाप्रबंधक रेलवे और स्टेशन अधीक्षक को नोटिस भेजा गया मगर कोई उत्तर न मिलने पर 11 सितंबर 2018 को अदालत में मुकदमा दायर किया.
7 वर्ष से अधिक समय तक मामला चला. आयोग ने दोनों पक्षों को सुना और रेलवे ने ट्रेन के विलंब को स्वीकार किया, लेकिन विलंब का कारण स्पष्ट नहीं किया. जिसपर कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए रेलवे को 45 दिन के भीतर 9 लाख 10 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है और यदि तय समय पर यह राशि उपभोक्ता को नहीं दी जाती है तो सम्पूर्ण राशि पर 12 प्रतिशत अलग से उपभोक्ता को ब्याज के तौर पर देना होगा.