उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा से लगे मुस्लिम पुरुषों ने कथित तौर पर कई सौ बीघा जमीन के लिए दुधी तहसील में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं से शादी की और उनका धर्म परिवर्तन कराया. और उनसे जमीनें खरीदवाकर अपने लोगों को बसवाया, यूपी की सबसे बड़ी पड़ताल.
एक पत्रकार के तौर पर मैं हमेशा अच्छी खबर की तलाश में रहता हूं, और पिछले हफ्ते जब मैं लखनऊ में अपने कुछ सूत्रों और समाजसेवियों से बात कर रहा था, तब मुझे एक धर्मांतरण रैकेट के बारे में पता चला.
आदिवासी और मुस्लिम आबादी में डेमोग्राफिक चेंज बहुत ही भयावह था. जिसको पता चलने के बाद मुझे उस जगह और वहां पर हो रहे बदलाव को जानने की बहुत इच्छा हुई. क्योंकि यह एक अलग तरीके का धर्मांतरण के बाद आदिवासी महिला को आगे कर डेमोग्राफी बदलने का खतरनाक खेल है.
अपने 10 साल के रिपोर्टिंग करियर में मैंने मिर्जापुर, बस्ती, लखनऊ के केजीएमयू डॉक्टर, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में छंगुर बाबा और सीमावर्ती जिले नेपाल बॉर्डर सहित महाराजगंज में धर्मांतरण की कई ऐसी भयावह कहानियां कवर की हैं. इसके बावजूद इस कहानी ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया. इसलिए मैंने सोनभद्र जिले में वास्तविकता का जायजा लेने का फैसला किया. इस नए तरीके के धर्मांतरण और डेमोग्राफी चेंज के पीछे आखिर असल कहानी क्या है?
मंगलवार की सुबह चार बजे लखनऊ से निकलकर सोनभद्र की दुधी तहसील तकरीबन 12 बजे पहुंचे. मेरे लिए सोनभद्र नई जगह थी, जहां ऐसे धर्मांतरण और आदिवासी महिलाओं की कहानी सवाल बनकर खड़ी थी. 8 घंटे का लंबा सफर पूरा करने के बाद मेरे मन में सोनभद्र को लेकर यह सोच आ रही थी कि यह क्षेत्र पहाड़ी भूमि, जंगल, पठार और खनिज ऊर्जा का स्रोत है, जो रास्ते में दिखा भी.
लेकिन दुद्दी तहसील, जो सोनभद्र से 80 किमी दूर पहाड़ों के बीच और बॉर्डर से लगी हुई है, मुख्यालय से एक घंटे का सफर तय करके वहां पहुंचे. इस दौरान ऊंची-नीची पहाड़ियां, संकरे रास्ते और पत्थरों के बीच काटकर बनाए गए रास्तों से हम गुजरे और पहुंचे.
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दुद्दी तहसील के बघाडू गांव के बाहर पहुंचते हुए, क्योंकि सफर काफी लंबा था, तो हम चाय पीने के लिए एक दुकान पर रुके. वहां एक बुजुर्ग शख्स मिले, जिनका नाम कन्हैयालाल था. हमने गाड़ी रोककर चाय पीते हुए उनसे पूछा कि यहां किस तरह के लोग रहते हैं और क्या कहानी है. उनका जवाब सुनकर मैं चौंक गया. उन्होंने दबे स्वर में कहा कि अब बहुत कुछ बदल गया है, बहुत से बाहरी लोग आकर बस गए हैं, पुराने लोग रहे ही कहां. हमने ज्यादा बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कुछ और बताने से इनकार कर दिया.
चाय पीने के बाद हम आगे बढ़े. लोकल रिपोर्टर के मुताबिक हमने लोकनाथ का घर पूछा, जो इस मामले के शिकायतकर्ता भी थे. गांव की गलियां काफी संकरी थीं. गाड़ी खड़ी कर हम पैदल उनके घर पहुंचे. दरवाजा खटखटाने पर एक 50-60 साल का व्यक्ति बाहर आया.
नमस्ते कर उसने कहा, बताइए भैया. हमने बताया कि हम लखनऊ से आए हैं और गांव के बारे में बात करनी है. हमें देखकर उनकी आंखें चमक गईं. उन्होंने तुरंत एक चारपाई बिछाई और पानी दिया. उन्होंने कहा कि यहां बहुत बदलाव हो गया है, बहुत सारी जमीनों पर बाहरी लोग बस गए हैं. इसकी शिकायत उन्होंने प्रशासन से भी की है.
इसके बाद वह हमें पड़ोस के घर ले गए. वहां रेनू कुमारी रहती हैं, जो एक आदिवासी युवती हैं. उन्होंने जो बताया, वह चौंकाने वाला था.
रेनू के अनुसार, इलाके में दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन कराने और जमीनों के स्वामित्व बदलने की कोशिश की गई. उन्होंने बताया कि परिवार को धमकियां दी गईं और शादी के लिए दबाव बनाया गया. जब उन्होंने इनकार किया तो उन्हें परेशान किया गया.
रेनू ने बताया कि उन्होंने पुलिस में शिकायत की, जिसके बाद कुछ कार्रवाई हुई और आरोपियों को जेल भेजा गया. लेकिन बाद में रिहा होने के बाद उन्हें फिर धमकियां मिलीं.
आगे बढ़ने पर हमारी मुलाकात मंगल सिंह से हुई, जिन्होंने अपनी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया और कहा कि वह प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं.
इस दौरान मौके पर पहुंचे लेखपाल ने बताया कि प्रशासन ने करीब 15 बीघा जमीन कब्जे से मुक्त कराई है और जांच जारी है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ मामलों में विवाह और जमीन खरीद के जरिए स्वामित्व में बदलाव हुआ है. इस पूरे मामले में फंडिंग और दस्तावेजों की जांच भी की जा रही है. इसके बाद हम रॉबर्ट्सगंज पहुंचे और जिलाधिकारी बीएन सिंह से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां कार्रवाई होगी.
पड़ताल के बाद जब हम सोनभद्र से लौट रहे थे, तो यह साफ था कि यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है. इसके कई पहलू हैं, जिनकी जांच जारी है. फिलहाल प्रशासन कार्रवाई कर रहा है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि ऐसे मामलों की जड़ तक पहुंचकर समाधान कैसे निकाला जाएगा.