करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में SIT जांच के बाद 8 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज हो चुका है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. अब विशेष जांच दल (SIT) की जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से कई बड़ी जानकारियां सामने आ रही हैं.
सूत्रों के मुताबिक, नोटों की गिनती के दौरान तैनात कर्मचारी मनीष कुमार यादव कई बार सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर चोरी करते हुए दिखाई दिया था. इसके बावजूद उस पर तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. जांच में यह भी सामने आया है कि मनीष कुमार यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का रिश्तेदार है और उसे इसी सिफारिश के आधार पर गणना प्रक्रिया में काम दिलाया गया था. इसी बीच एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में सिर्फ कथित चोरी की घटना ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में मौजूद कई प्रक्रियागत कमियों को भी चिन्हित किया है.
एसआईटी जांच में क्या-क्या सामने आया?
सूत्रों के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि चढ़ावे की गिनती और अभिलेखों के रख-रखाव की व्यवस्था में गंभीर कमियां थीं. भेंट और चढ़ावा सामग्री को अलग-अगल रखने की प्रक्रिया भी व्यवस्थित नहीं थी. जांच में यह भी पाया गया कि आंतरिक नियंत्रण प्रणाली बेहद कमजोर थी और निगरानी तथा जवाबदेही तय करने की स्पष्ट व्यवस्था मौजूद नहीं थी. रिपोर्ट में इन कमियों को गंभीर मानते हुए सुधारात्मक कदम उठाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की गई है.
एफआईआर में क्या कहा गया
25 जून 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की ओर से थाना राम जन्मभूमि में दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच, उपलब्ध मौखिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि गणना प्रक्रिया में लगे कुछ कर्मियों ने सुनियोजित और बार-बार भेंट व चढ़ावे की धनराशि की चोरी, गबन किया गया. एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रमाशंकर के खिलाफ चोरी, गबन, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की बात कही गई है. इसके अलावा एफआईआर में सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की आवश्यकता बताई गई है.
आखिर कैसे सामने आया पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, मई के अंतिम सप्ताह में ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही राशि और दान पेटियों से निकलने वाले चढ़ावे के आंकड़ों का मिलान किया. इसी दौरान कुछ दान पेटियों से निकलने वाली रकम में असामान्य कमी दिखाई दी. बताया जाता है कि एक दान पेटी से सामान्य तौर पर 7 से 8 लाख रुपये तक निकलते थे, लेकिन लगातार कुछ दिनों तक 500 रुपये की गड्डियों में कमी नजर आने लगी. इसी संदेह के बाद नोट गिनने वाले कमरे में अतिरिक्त गुप्त कैमरे लगाए गए.
हिडन कैमरों में क्या दिखा
सूत्रों के अनुसार, एक सप्ताह तक रिकॉर्ड हुई फुटेज देखने पर कथित तौर पर पूरा तरीका सामने आ गया. जांच में दावा है कि नोट गिनने के दौरान कुछ कर्मचारी जानबूझकर सामान्य सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े हो जाते थे, जबकि उनका दूसरा साथी पीछे तैयार की गई नोटों की गड्डियों से नोट निकालकर कपड़ों में छिपा लेता था. सामने लगे कैमरों में यह गतिविधि स्पष्ट नहीं दिखती थी, लेकिन गुप्त कैमरों की रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर पूरी घटना दर्ज हो गई. जांच में कथित तौर पर एक और तरीका सामने आया. सूत्रों के मुताबिक, नोट गिनने वाले कर्मचारी गड्डी तैयार करते समय अतिरिक्त नोट जोड़ देते थे. बैंक में गड्डियों की संख्या के आधार पर वाउचर बन जाता था और प्रत्येक नोट की अलग-अलग गिनती नहीं होती थी. आरोप है कि मंदिर से बैंक तक ले जाने के दौरान गड्डियों में रखे अतिरिक्त नोट निकाल लिए जाते थे. इससे वाउचर और जमा रकम का मिलान भी सही दिखाई देता था और कथित तौर पर चोरी भी हो जाती थी. जांच में सामने आया है कि वाउचर तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े अनुकल्प मिश्रा और उसके बहनोई लवकुश मिश्रा की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस पहले ही लवकुश मिश्रा के घर से लगभग 10 लाख रुपये बरामद कर चुकी है.
रिश्तेदारी और सिफारिश के आधार पर मिली थी नौकरी
सूत्रों के मुताबिक, नोट गिनने वाले कई कर्मचारी किसी न किसी परिचित या सिफारिश के जरिए इस प्रक्रिया से जुड़े थे. जांच में यह भी सामने आया है कि व्यवस्थापक के रूप में काम कर रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को इस काम में लगवाया था. इसी तरह वर्षों से काम कर रहे अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लवकुश मिश्रा को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नियुक्तियों की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी और निगरानी व्यवस्था में किन स्तरों पर चूक हुई.
बैंक खाते से भी जुड़ रही जांच
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल एक आरोपी के बैंक खाते का मिलान करने पर जांच एजेंसियों को कुछ लेन-देन संदिग्ध लगे. ट्रस्ट के अधिकारियों ने बैंक में जमा रकम और संबंधित तारीखों का मिलान किया. जांच अब इस पहलू पर भी आगे बढ़ रही है कि कथित रूप से चोरी की गई राशि का उपयोग किस तरह किया गया.