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लखनऊ हत्याकांड: जेल जाने से पहले बहन से लिपटकर रोया अक्षत, पुलिस के सामने उगले खौफनाक राज!

लखनऊ के आशियाना मर्डर केस में आरोपी बेटे अक्षत के मोबाइल ने कई खौफनाक राज उगले हैं. हत्या के बाद शव को सुरक्षित रखने के तरीके खोजने से लेकर ऑनलाइन आरी मंगवाने तक, अक्षत ने बेरहमी की सारी हदें पार कर दी थीं. जेल जाने से पहले वह अपनी बहन से मिलकर फूट-फूटकर रोया.

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लखनऊ के आशियाना मर्डर केस में आरोपी बेटे अक्षत को जेल (Photo- ITG)
लखनऊ के आशियाना मर्डर केस में आरोपी बेटे अक्षत को जेल (Photo- ITG)

लखनऊ के आशियाना बंगला बाजार में 19 फरवरी को अक्षत ने अपने पिता और शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की उनके घर की तीसरी मंजिल पर गोली मारकर हत्या कर दी. अक्षत ने भारी आक्रोश में आकर लाइसेंसी राइफल से पिता का सिर उड़ा दिया और फिर साक्ष्य मिटाने के लिए शव के छह टुकड़े कर दिए. उसने शव को सड़ने से बचाने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया और ऑनलाइन आरी व चाकू मंगवाए. पुलिस ने तीन दिन की पूछताछ के बाद बुधवार को आरोपी को जेल भेज दिया है, जबकि अन्य लोगों की भूमिका की जांच अब भी जारी है.

इंटरनेट पर खोजा शव सुरक्षित रखने का तरीका

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हत्या के बाद अक्षत ने इंटरनेट पर सर्च किया था कि शव को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखा जाए. उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से चाकू का सेट और आरी मंगवाई थी. 

पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने पिता का पेट चाकू से इसलिए फाड़ा था ताकि शव जल्दी सड़े नहीं. अक्षत ने शरीर के छह टुकड़े किए क्योंकि वह पूरे शव को नीले ड्रम में नहीं रख पा रहा था. वह धड़ को नहर में फेंकना चाहता था, लेकिन ड्रम भारी होने के कारण कार में नहीं लाद सका.

आक्रोश की रात और हत्या का कबूलनामा

अक्षत ने पुलिस को बताया कि 19 फरवरी की रात पिता नशे में थे और उन्होंने गाली-गलौज करते हुए उस पर राइफल तान दी थी. किसी तरह शांत कराने के बाद पिता सो गए, लेकिन अक्षत रातभर जागता रहा. उसके मन में पिता के प्रति जबरदस्त आक्रोश भरा था. तड़के उसने वही राइफल उठाई और पिता को गोली मार दी. जेल जाने से पहले उसने पुलिस के सामने अपनी गलती मानी और कहा कि उससे बड़ी चूक हो गई.

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जेल जाने से पहले बहन से आखिरी मुलाकात

जेल भेजे जाने से पहले अक्षत ने पुलिस से अपनी बहन से मिलने की गुहार लगाई. पुलिस उसकी बहन को स्कूल से थाने लेकर आई, जहां  दोनों की भावुक मुलाकात हुई. अक्षत बहन से लिपटकर फूट-फूटकर रोया और उससे अपना ख्याल रखने को कहा. 

दूसरी तरफ, बैकुंठ धाम में मानवेंद्र का अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके भतीजे ने मुखाग्नि दी. पारिवारिक परंपरा के चलते मानवेंद्र के वृद्ध पिता अपने बेटे की अंतिम विदाई में शामिल नहीं हुए.

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