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90 साल की विरासत, अरबों का साम्राज्य और लैंबॉर्गिनी हादसा... कानपुर के शिवम मिश्रा की पूरी कहानी

कानपुर में लैंबॉर्गिनी हादसे के बाद कारोबारी शिवम मिश्रा का नाम सुर्खियों में है. पुलिस ने सुपरकार को सीज कर जांच तेज कर दी है, जबकि ड्राइवर बनाम खुद ड्राइव करने के दावों के बीच नए वीडियो भी चर्चा में हैं. बता दें कि शिवम मिश्रा 90 साल पुरानी कारोबारी विरासत वाले बंशीधर टोबैको ग्रुप को संभालता है. वह अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है.

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लैंबॉर्गिनी हादसे में आया है कानपुर के शिवम मिश्रा का नाम. (File Photo: ITG)
लैंबॉर्गिनी हादसे में आया है कानपुर के शिवम मिश्रा का नाम. (File Photo: ITG)

कानपुर के वीआईपी रोड पर हुई एक हाई-स्पीड लैंबॉर्गिनी दुर्घटना ने न सिर्फ ट्रैफिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शहर के एक बड़े कारोबारी परिवार को सुर्खियों में ला दिया है. इस हादसे में जिस लग्जरी कार का नाम सामने आया, वह बंशीधर टोबैको ग्रुप से जुड़े उद्योगपति फैमिली की है. पुलिस का कहना है कि उस सुपरकार को शिवम मिश्रा चला रहा था, जो कानपुर के प्रमुख कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है और बंशीधर टोबैको ग्रुप की कंपनी का डायरेक्टर है.

दरअसल, रविवार को कानपुर के पॉश ग्वालटोली इलाके की वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी बेकाबू हो गई. कार ने पहले एक ई-रिक्शा को टक्कर मारी, फिर एक बाइक सवार और राहगीर को चपेट में लिया. इसके बाद कार सड़क किनारे खंभे से जा टकराई. हादसे में कई लोग घायल हुए, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया.

यह भी पढ़ें: कानपुर में अरबपति के बेटे शिवम मिश्रा पर FIR, जानिए कैसे लैंबॉर्गिनी कांड में अज्ञात से नामजद तक पहुंची पुलिस

दुर्घटना के समय कार के पीछे एक अन्य वाहन में बाउंसर चल रहे थे. मौके के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें सुरक्षा कर्मी भीड़ को दूर करते और पुलिस से बात करते दिख रहे हैं. इस केस में पहले पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जबकि सोमवार को जांच के बाद शिवम मिश्रा का नाम सामने आया. ग्वालटोली थाने में खड़ी लैंबॉर्गिनी को सीज कर दिया गया है.

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ड्राइवर या खुद शिवम? दावों के बीच नया वीडियो

मामले में मोड़ तब आया, जब बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि कार शिवम मिश्रा नहीं, बल्कि ड्राइवर चला रहा था. वहीं परिवार की तरफ से बयान आया कि शिवम को मेडिकल इमरजेंसी के चलते दिल्ली भेजा गया है.

घटना के तुरंत बाद का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा नजर आ रहा है. कार में कोई ड्राइवर नहीं दिखता. पुलिस का कहना है कि सभी वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कराई जा रही है.

यह भी पढ़ें: कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड: जब शिवम मिश्रा ने इनकम टैक्स अधिकारियों पर तान दी थी पिस्टल, लॉकडाउन में पुलिस से भिड़ने का भी आरोप

जांच के सिलसिले में पुलिस टीम स्वरूपनगर स्थित केके मिश्रा के आवास पर भी पहुंची, लेकिन काफी देर तक गेट नहीं खोला गया. ड्यूटी पर पहुंचे अधिकारी ने बताया कि उन्हें जांच के लिए भेजा गया था, पर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद टीम लौट गई. इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए हैं.

कौन हैं केके मिश्रा और क्या है 90 साल पुराना कारोबार

शिवम मिश्रा कानपुर के बड़े कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है. मिश्रा परिवार बंशीधर टोबैको ग्रुप से जुड़ा है, जिसकी कारोबारी विरासत करीब 90 साल पुरानी है. यह ग्रुप पान मसाला और गुटखा उद्योग से जुड़े बड़े ब्रांड्स को तंबाकू और संबंधित कच्चा माल सप्लाई करता है. कंपनी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली, गुजरात और मुंबई तक है.

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बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और संबद्ध कंपनियां इस सेक्टर में बड़ी सप्लाई चेन का हिस्सा हैं. स्थानीय कारोबारी हलकों में मिश्रा परिवार लंबे समय से प्रभावशाली नाम रहा है.

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कंपनी में शिवम मिश्रा की भूमिका

शिवम मिश्रा कंपनी में डायरेक्टर पद पर है. मैन्युफैक्चरिंग से लेकर फाइनेंस व विस्तार रणनीति तक के फैसलों में उसकी भूमिका रहती है. कानपुर और दिल्ली के वसंत विहार में रहने वाला शिवम लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगी कारों के कलेक्शन के लिए चर्चित रहा है. उसके पास रोल्स रॉयस, लैंबॉर्गिनी, फेरारी, मैकलेरन और पोर्श जैसी सुपरकारें हैं. इसके अलावा महंगी ब्रांडेड और डायमंड घड़ियों के शौक को लेकर भी नाम चर्चा में रहा है.

2024 की इनकम टैक्स रेड से भी आया था नाम

मिश्रा परिवार इससे पहले भी चर्चा में आ चुका है. मार्च 2024 में आयकर विभाग ने कानपुर और दिल्ली समेत करीब 20 ठिकानों पर छापेमारी की थी.

अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के दौरान भारी नकदी, लग्जरी गाड़ियां, ज्वेलरी और महंगी घड़ियां बरामद की गई थीं. कुछ रिपोर्टों में करोड़ों की टैक्स गड़बड़ी की बात सामने आई थी. जब्त की गई गाड़ियों में कई हाई-एंड मॉडल शामिल बताए गए थे, जिन पर एक जैसे विशेष नंबर भी दर्ज थे.

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हादसे के बाद उठे सवाल

लैंबॉर्गिनी हादसे के बाद बड़ा सवाल यह उठा कि गंभीर दुर्घटना और कई लोगों के घायल होने के बावजूद शुरुआती एफआईआर अज्ञात चालक के खिलाफ क्यों दर्ज हुई. सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में पुलिसकर्मी कार को ढकते नजर आए, जिस पर वीआईपी ट्रीटमेंट के आरोप लगे. बाद में SHO को हटाकर पुलिस लाइन भेजे जाने की कार्रवाई ने भी बहस को और हवा दी.

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अब पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा.

अब इस केस में आगे क्या?

फिलहाल पुलिस वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान जुटा रही है. ड्राइविंग सीट पर कौन था, कार की स्पीड क्या थी, और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं- इन सभी बिंदुओं पर जांच जारी है.

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(सिमर चावला के इनपुट के साथ)
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