
कानपुर के वीआईपी रोड पर रविवार को हुई लैंबॉर्गिनी कार दुर्घटना का मामला सोमवार को और गरमा गया. देर रात पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जबकि सोमवार सुबह ग्वालटोली थाने में खड़ी लैंबॉर्गिनी को सीज कर दिया गया. जांच के दौरान कथित तौर पर कार चला रहे शिवम मिश्रा का नाम भी सामने आया है.
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वाहन लैंबॉर्गिनी हो या कोई सामान्य कार. घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. पुलिस का कहना है कि एफआईआर में पहले नाम इसलिए नहीं जोड़ा गया क्योंकि उस समय चालक की पहचान स्पष्ट नहीं थी. जांच में सामने आया कि कार शिवम चला रहा था, हालांकि बचाव पक्ष इस दावे से इनकार कर रहा है.
जानिए पूरा मामला
कानपुर के अरबपति तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम रविवार को अपनी लैंबॉर्गिनी से वीआईपी रोड पर घूम रहा था. सुरक्षा के लिए पीछे एक अन्य वाहन में बाउंसर मौजूद थे. रेव-3 मॉल के पास अचानक कार अनियंत्रित हो गई और पहले एक ई-रिक्शा, फिर बाइक सवार और एक राहगीर को टक्कर मार दी. इसके बाद कार सड़क किनारे खंभे से जा टकराई.
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हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जुट गई. वायरल वीडियो में देखा गया कि बाउंसरों ने ड्राइविंग सीट से शिवम को गोद में उठाकर बाहर निकाला. सूचना पर पहुंची ग्वालटोली पुलिस कार को थाने ले गई, जहां उसे कवर कर खड़ा किया गया. बाउंसरों के व्यवहार और पुलिस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली.
शुरुआत में नरम रुख
घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे. पहले यह कहा गया कि कार चला रहे शिवम को हार्ट अटैक आया था, जिसके चलते हादसा हुआ. तीनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. घायल तौफीक की शिकायत पर दिल्ली नंबर की कार के अज्ञात चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.

फिर बदले तेवर
सोमवार सुबह पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जांच में सामने आया है कि वाहन शिवम ही चला रहा था और बाउंसरों ने उसे कार से बाहर निकाला. पुलिस ने पूछताछ के लिए शिवम के घर भी पहुंचने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. आगे की कार्रवाई की बात कही गई है.
पुलिस को नहीं मिली एंट्री
स्वरूपनगर स्थित शिवम के पिता केके मिश्रा के आवास पर जांच अधिकारी पुलिस टीम के साथ पहुंचे, लेकिन गेट नहीं खोला गया. वहीं बचाव पक्ष के वकील मृत्युंजय मिश्रा ने दावा किया कि कार शिवम नहीं बल्कि उसका ड्राइवर चला रहा था. कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की जा चुकी है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी.
7 साल से कम सजा वाली धाराएं
पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की धारा 281, 125ए, 125बी और 324(4) के तहत केस दर्ज किया है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी धाराओं में अधिकतम सजा सात साल से कम है, इसलिए तत्काल गिरफ्तारी संभव नहीं है.
एसएचओ लाइन हाजिर
मामले में लापरवाही के आरोपों के चलते पुलिस कमिश्नर ने ग्वालटोली थाने के एसएचओ संतोष कुमार गौड़ को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया. वहीं, थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा लैंबॉर्गिनी के साथ फोटो और सेल्फी लेने के वीडियो भी सामने आए, जिससे विभाग की किरकिरी हुई.