इजरायल और ईरान के बीच जंग का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दर्द हजारों किलोमीटर दूर भारत के घरों में भी महसूस किया जा रहा है. झांसी के पुलिस लाइन के पीछे घरैया लाइन इलाके में रहने वाला एक परिवार चिंता में डूबा हुआ है. उनका बेटा नकी असगरी ईरान में रहता है. अब उससे संपर्क टूट गया है.
नकी असगरी करीब 10 से 12 साल पहले मौलवी की तालीम हासिल करने के लिए ईरान गया था. वह अकेले नहीं गया, बल्कि अपनी पत्नी और बच्चों को भी साथ लेकर वहां बस गया. परिवार के मुताबिक, वह बीच-बीच में भारत आता रहा और आखिरी बार साल 2019 में झांसी आया था. इसके बाद से फोन के जरिए नियमित बातचीत होती रही, जिससे परिवार को उसकी सलामती की जानकारी मिलती रहती थी.

लेकिन जैसे ही इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की खबरें सामने आईं, परिवार की चिंता अचानक बढ़ गई. परिजनों ने नकी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कई दिनों से उसका फोन नहीं लग रहा. लगातार कोशिशों के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला, तो परिवार की बेचैनी डर में बदल गई.
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नकी के चाचा सैय्यद हमदुल हुसैन बताते हैं कि वह हमारा भतीजा है, वहां तालीम हासिल कर रहा है. उसके साथ उसकी पत्नी और तीन बच्चे भी हैं. लेकिन मौजूदा हालात में वहां से कोई खबर नहीं मिल रही. सब कुछ बंद है, कोई संपर्क नहीं हो पा रहा. हम बहुत परेशान हैं.
उन्होंने बताया कि परिवार के कुछ सदस्य दिल्ली में हैं, जबकि झांसी में भी सभी लोग बेहद चिंतित हैं. हर दिन टीवी और मोबाइल पर खबरें देखकर डर और बढ़ जाता है. ऐसे में परिवार सिर्फ दुआ कर रहा है कि नकी और उसका परिवार सुरक्षित हों.
परिजनों ने सरकार से भी मदद की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि सरकार को ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी अपील की कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म कराया जाए, ताकि निर्दोष लोगों की जान खतरे में न पड़े.
अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है. झांसी का यह परिवार उम्मीद में है कि उनका बेटा और उसका परिवार सुरक्षित लौट आए और यह हालात जल्द से जल्द बदलें.