मथुरा से गिरफ्तार किए गए आईआईटी रुड़की के छात्र रहे और अब आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता अभिषेक मिश्रा को लेकर नए दावे और नए सवाल सामने आ रहे हैं. पुलिस जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि अभिषेक मिश्रा के संपर्क में बड़ी संख्या में लड़कियां थीं. जांच के दौरान ऐसे दावे भी सामने आए हैं कि करीब दो दर्जन लड़कियां उसके प्रभाव में थीं. इनमें से अधिकांश के साथ उसने संबंध बनाए थे, हालांकि पुलिस अभी इन दावों की पुष्टि के लिए डिजिटल साक्ष्यों, बयानों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है.
सबसे ज्यादा चर्चा अभिषेक के मोबाइल फोन से मिले डेटा को लेकर है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोबाइल में मौजूद फोटो, वीडियो, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री अब जांच का अहम आधार बन गई है. अभिषेक मिश्रा का नाम पहली बार इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि सामान्य नहीं थी. पुलिस के अनुसार, वह वर्ष 2017 में IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुका है. इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उसने आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों की ओर रुख किया. बताया जाता है कि वह ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता और अन्य धार्मिक विषयों पर प्रवचन देता था. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उसके साथ बड़ी संख्या में लोग जुड़े. उसके वीडियो अलग-अलग राज्यों तक पहुंचते थे और कई युवा भी उससे प्रभावित होकर संपर्क में आए. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि उसकी शैक्षणिक योग्यता और प्रभावशाली बोलने की शैली ने लोगों का भरोसा जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
पुलिस जांच में सामने आए दावे
एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, मामले की जांच के दौरान कई युवतियों ने शारीरिक शोषण से जुड़े आरोप लगाए हैं. पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, एक युवती के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था. इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया. जांच आगे बढ़ी तो कई अन्य जानकारियां भी सामने आने लगीं. पुलिस का कहना है कि कुछ युवतियों ने दावा किया है कि धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर शुरू हुआ संपर्क धीरे-धीरे भावनात्मक निर्भरता में बदल गया. हालांकि इन सभी आरोपों की जांच की जा रही है और पुलिस अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है.
मोबाइल में मिले फोटो-वीडियो क्यों बने सबसे बड़ा सुराग
पूरे मामले में आरोपी का मोबाइल फोन जांच एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल में मौजूद कई फोटो और वीडियो की जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की ओर से भी कुछ डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई गई है. इन तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की पुष्टि की जा रही है. जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि ये सामग्री कब रिकॉर्ड की गई और किन परिस्थितियों में बनाई गई. सूत्रों के अनुसार, पुलिस डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार कर रही है ताकि मोबाइल से मिले डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके.
पढ़ी-लिखी युवतियां भी संपर्क में थीं
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी के संपर्क में आने वाली कई युवतियां उच्च शिक्षित थीं. इनमें बीटेक, एमटेक और एमबीए जैसी पढ़ाई कर चुकी युवतियों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं. यही पहलू जांच अधिकारियों को भी हैरान कर रहा है. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि वाली युवतियां उसके संपर्क में आईं और उनके संबंध कितने गहरे थे. जांच टीम का मानना है कि इस सवाल का जवाब मिलने से पूरे घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है.
गंधर्व विवाह का दावा बना जांच का अहम हिस्सा
एफआईआर के अनुसार, एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अभिषेक मिश्रा ने उसे यह विश्वास दिलाया कि दोनों का 'गंधर्व विवाह' हो चुका है. पीड़िता का आरोप है कि इसी विश्वास के आधार पर उससे शारीरिक संबंध बनाए गए. पुलिस का कहना है कि यह दावा जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इसी तरह की बातें अन्य लोगों के सामने भी कही गई थीं या नहीं. एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि लगभग छह महीने पहले भी एक परिवार आरोपी के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचा था. उस समय भी मामले की जांच की गई थी. अब नए तथ्यों और ताजा शिकायतों के सामने आने के बाद पुराने इनपुट्स को भी दोबारा खंगाला जा रहा है. पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या पहले मिली शिकायतों और वर्तमान मामले के बीच कोई संबंध है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो
गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर अभिषेक मिश्रा से जुड़े कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. कुछ वीडियो में वह मृदंग बजाते हुए भजन-कीर्तन करता दिखाई देता है. कुछ अन्य वीडियो में धार्मिक आयोजनों में शामिल नजर आता है. हालांकि पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद किसी भी वीडियो को जांच पूरी होने तक अंतिम साक्ष्य नहीं माना जा सकता. हर सामग्री की स्वतंत्र पुष्टि की जा रही है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान तीन युवतियों को भी बरामद किया गया. उनसे पूछताछ की जा रही है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वे वहां किन परिस्थितियों में मौजूद थीं और मामले से उनका क्या संबंध है. मथुरा पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है. डिजिटल डेटा, पीड़ितों के बयान, आर्थिक लेन-देन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. फिलहाल गोवर्धन से शुरू हुआ यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर किसी की नजर जांच की अगली कड़ी पर टिकी है.