
Uttar Pradesh News: मथुरा सिंचाई विभाग ने हाईवे इलाके और कृष्णानगर के बीच गोवर्धन ड्रेनेज नाले की भूमि पर बने 300 अवैध मकानों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में विभाग ने 20 जनवरी को इन घरों पर लाल निशान लगाकर बेदखली का नोटिस थमाया. सिंचाई विभाग की जमीन (गणेशरा से पोतरा कुंड तक) पर वर्षों से हुए अवैध कब्जे को हटाने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है. सात दिनों की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद, 28 जनवरी तक तोड़फोड़ शुरू न होने से क्षेत्र में भारी तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
वर्षों पुराना कब्जा और सुप्रीम कोर्ट का डंडा
सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर पंजाबी शर्मा के अनुसार, यह जमीन अपर खंड आगरा नहर मथुरा की है. इस ड्रेनेज नाले की पटरी पर लंबे समय से लोगों ने पक्के निर्माण कर लिए थे.

विभाग इससे पहले भी चार बार नोटिस जारी कर चुका था, लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के सीधे हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई को टाला नहीं जा सकता. 20 जनवरी को विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी अवैध मकानों की नंबरिंग की और उन्हें सात दिन के भीतर स्वतः कब्जा हटाने की अंतिम चेतावनी दी.
स्थानीय निवासियों का फूटा गुस्सा
जैसे ही विभाग ने नोटिस चस्पा किए, स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. निवासियों का तर्क है कि वे यहां पिछले 80 वर्षों से रह रहे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज हैं. लोगों का कहना है कि जब मकान बन रहे थे, तब विभाग सोया हुआ था और अब अचानक उन्हें बेघर करने की साजिश रची जा रही है. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ कर दिया है कि वे अपना घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और प्रशासन की इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करेंगे.
क्या रुक पाएगी विध्वंस की कार्रवाई?
फिलहाल 28 जनवरी तक कोई मशीनी तोड़फोड़ शुरू नहीं हुई है, लेकिन विभाग की तैयारी पूरी है. नोटिस की अवधि बीत चुकी है और अधिकारी किसी भी वक्त भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच सकते हैं. उधर, पीड़ित परिवार अब कानूनी राहत या राजनीतिक हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठे हैं. प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह बिना किसी बड़े विवाद के इस संवेदनशील क्षेत्र से अतिक्रमण कैसे हटाता है.