भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सुल्तानपुर पुलिस और स्थानीय विधायक पर सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 15 मार्च को दो पक्षों में हुए संपत्ति विवाद के बाद पुलिस ने प्रतिष्ठित नेता राणा अजीत प्रताप सिंह और उनके पूरे परिवार, जिसमें एक रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी भी शामिल हैं, को जेल भेज दिया. एमएलसी का दावा है कि सत्तारूढ़ दल के एक विधायक की साजिश के तहत महज 9 दिनों के भीतर 12 लोगों पर 25-25 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया. देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्य सचिव गृह और एसपी पर तटस्थ न रहने का आरोप लगाते हुए माननीय न्यायालय से नागरिकों के जीवन की रक्षा करने की गुहार लगाई है.
अपनों के ही खिलाफ बगावत और गंभीर आरोप
देवेंद्र प्रताप सिंह ने 'आज तक' से बातचीत में कहा कि सुल्तानपुर के एसपी उन 12 लोगों की हत्या करना चाहते हैं, जिन्हें बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है. उन्होंने कहा कि पुलिस अब अपराधियों की तरह पेश आ रही है और यह सीधे तौर पर गुंडागर्दी है. एमएलसी के अनुसार, राणा अजीत प्रताप सिंह का परिवार बेदाग रहा है, उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. विधायक ने प्लानिंग के तहत उन्हें फंसाया और खुद वैष्णो देवी की यात्रा पर चले गए.
मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंच रही ग्राउंड की हकीकत
एमएलसी ने सरकार की कानून-व्यवस्था की तारीफ तो की, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि आम आदमी बहुत दुखी है और मुख्यमंत्री तक जमीनी हकीकत नहीं पहुंच पा रही है. जब व्यवस्था से कोई उम्मीद नहीं बचती, तभी व्यक्ति न्याय के मंदिर का दरवाजा खटखटाता है. उन्होंने साफ किया कि वह अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे, चाहे सामने अपनी ही पार्टी का विधायक क्यों न हो.
इनाम घोषित करने पर उठाए बड़े सवाल
उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी साधारण मारपीट की घटना में इतनी जल्दी भारी इनाम घोषित किए गए हैं. देवेंद्र प्रताप सिंह ने इसे सत्ता का खुला दुरुपयोग करार दिया है. उन्होंने हाई कोर्ट को मेल भेजकर आग्रह किया है कि इन नौजवानों के जीने के अधिकार की रक्षा की जाए और पुलिस कप्तान को उनकी जान लेने से रोका जाए. उनका कहना है कि जनप्रतिधि मुख्यमंत्री से मिलते तो हैं, लेकिन कार्रवाई क्या होती है, यह भगवान ही जानता है.