यूपी के बरेली के शहर काजी मौलाना अमजद रजा खान और उनके परिवार समेत सैकड़ों भारतीय नागरिक वर्तमान में चल रहे ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं. काजी साहब 23 फरवरी को इबादत के लिए मक्का शरीफ गए थे, जहां उनके साथ उनके बच्चे और अन्य रिश्तेदार भी मौजूद हैं. इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द होने की वजह से उनकी 4 तारीख की वापसी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. इस स्थिति को देखते हुए जमात रजा मुस्तफा के नेशनल सेक्रेट्री मेहंदी हसन और ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने भारत सरकार से गुहार लगाई है. वहीं, बरेली में रहने वाले उनके परिजनों और मुरीदों में दहशत का माहौल बना हुआ है.
मक्का शरीफ में फंसे हैं सैकड़ों जायरीन
जमात रजा मुस्तफा के नेशनल सेक्रेट्री मेहंदी हसन ने बताया कि हजरत अमजद रजा खान अपने बेटे, बेटी और रिश्तेदारों के साथ 23 फरवरी को मक्का गए थे. रमजान का पवित्र महीना होने के कारण वहां दुनिया भर से बड़ी तादाद में लोग पहुंचे हैं. युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बाधित हुई हैं, जिससे उनकी वापसी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. हालांकि परिजनों की उनसे लगातार बात हो रही है, लेकिन इंटरनेशनल मुद्दा होने के कारण बरेली में लोगों के बीच गहरी चिंता और डर का माहौल है.
अरब देशों में भारतीयों की सुरक्षा पर संकट
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने युद्ध की विभीषिका पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग में सबसे ज्यादा मुश्किल भारतीयों के लिए पैदा हो गई है. अरब देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रोजगार और व्यापार के सिलसिले में रहते हैं. अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद वहां बेचैनी बढ़ गई है. मौलाना ने कहा कि यह जंग लंबी खिंच सकती है, इसलिए भारत सरकार को अभी से प्लानिंग करनी चाहिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरक्षित वापसी की अपील
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं. मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने कहा कि भारत सरकार को समय रहते कदम उठाना चाहिए ताकि वहां काम करने वाले मजदूरों और इबादत के लिए गए जायरीन को कोई नुकसान न पहुंचे. उन्होंने इजरायल और अमेरिका द्वारा रिहायशी इलाकों, स्कूलों और अस्पतालों पर किए जा रहे हमलों की निंदा करते हुए भारतीयों की जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है.
जारी है जंग का डर और वापसी की उम्मीद
फिलहाल सभी की निगाहें 4 मार्च पर टिकी हैं, जब शहर काजी की वापसी का समय तय है. मेहंदी हसन को उम्मीद है कि वक्त रहते स्थितियां ठीक होंगी और सभी लोग सकुशल वतन लौटेंगे. मौलाना शहाबुद्दीन ने स्पष्ट किया कि ईरान अकेले ही डटा हुआ है, लेकिन इस वैश्विक तनाव के बीच निर्दोष नागरिकों और कामगारों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है. भारत सरकार के हस्तक्षेप से ही वहां फंसे एक करोड़ भारतीयों और बरेली के सैकड़ों लोगों की वतन वापसी मुमकिन हो पाएगी.