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दो फीट पानी में डूबा स्वास्थ्य केंद्र, सड़कें बनी तालाब... जलभराव ने खोली प्रशासन के दावों की पोल

उत्तर प्रदेश के बांदा में कुछ घंटों की बारिश ने प्रशासन के सफाई और जलनिकासी के दावों की पोल खोल दी. तिंदवारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो फीट तक पानी भर गया, जबकि सड़कें और गलियां तालाब में बदल गईं. मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने पानी निकासी के आदेश दिए हैं.

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सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)
सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)

उत्तर प्रदेश के बांदा में महज कुछ घंटों की बारिश ने प्रशासन की तैयारियों और सफाई व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी. जिले के तिंदवारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इतना पानी भर गया कि पूरा अस्पताल परिसर किसी स्विमिंग पूल जैसा नजर आने लगा. वहीं शहर और कस्बों की कई सड़कें व गलियां तालाब में तब्दील हो गईं. जलभराव के कारण मरीजों, तीमारदारों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

अस्पताल परिसर में करीब दो फीट तक पानी भर जाने से मरीजों का आना-जाना मुश्किल हो गया. कई जगह बिजली भी गुल हो गई, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित रहीं. मरीजों का कहना है कि जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण हालात और खराब हो गए.

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बारिश के बाद सामने आए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इन तस्वीरों में लोग घुटनों तक पानी में होकर अस्पताल और सड़कों से गुजरते दिखाई दे रहे हैं. वायरल वीडियो के बाद प्रशासन हरकत में आया और जलनिकासी के निर्देश जारी किए गए.

डिलीवरी कराने पहुंची महिला बोली- कोई सुनने वाला नहीं

अस्पताल में मौजूद एक महिला तीमारदार ने बताया कि वह अपनी बहू की डिलीवरी कराने स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी, लेकिन पूरे परिसर में पानी भरा होने से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उनका आरोप है कि अस्पताल में व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावित हैं और उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है.

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मरीजों का कहना है कि पानी भरने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है. इसके चलते अस्पताल की कई सेवाएं प्रभावित हुईं. लोगों ने छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि जलभराव के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त होती तो अस्पताल और आसपास के इलाके में ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती.

सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी

बारिश के बाद जिले के कई इलाकों में सड़कें और गलियां पूरी तरह पानी में डूब गईं. कई स्थानों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया, जबकि नालों की सफाई नहीं होने के कारण पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया.

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका और पंचायतों में सफाई के नाम पर केवल कागजी काम हुआ है. उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भी लोग जलभराव को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं. लोगों का कहना है कि हर साल बारिश में ऐसे हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता.

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वीडियो वायरल होने के बाद जागा प्रशासन

जलभराव की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया. इसके बाद प्रशासन ने तत्काल पानी निकासी के निर्देश जारी किए.

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि आदेश जारी होने और जमीनी स्तर पर काम शुरू होने में अक्सर काफी समय लग जाता है. अब देखना होगा कि निचले स्तर के कर्मचारी कितनी जल्दी जलनिकासी कर लोगों को राहत दिला पाते हैं.

फिलहाल बारिश के बाद सामने आई तस्वीरों ने प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल से लेकर सड़कों तक फैले जलभराव ने साफ कर दिया कि मानसून से पहले की तैयारियां और सफाई व्यवस्था कई जगहों पर नाकाफी साबित हुई हैं.

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